Tuesday, February 20, 2018

AGEING GRACEFULLY* / *शालीनता से जीयें*

*AGEING GRACEFULLY* / *शालीनता से जीयें*
                  Part/भाग --XVII
                            --Jagmohan Gautam
 --जगमोहन गौतम
मित्रों,

अभी तक उक्त श्रंखला के 16 संस्करणों में हमने जीवन के स्वर्णिम काल मैं शारीरिक एवम मानसिक स्वास्थ्य हेतु भारतीय जीवन शैली के सर्वमान्य सिद्धांतों के मुख्य घटकों पर चर्चा की है जिनको यदि जीवन का आधार बना लिया जाय तो अवश्य ही हम वर्द्धावस्था की अनेक बाधाओं को सफलता पूर्वक पार करके आनन्द मय जीवन व्यतीत कर सकते हैं। जिन जीवन शैली के घटकों पर हमने विस्तृत चर्चा की, वह निम्न हैं:
1. *सक्रिय रहे* / Be Active : दैनिक शारीरिक क्रियाकलाप आपके जीवन और जीवन-काल को बहुत सीमा तक सुधार या बढ़ा सकते हैं। इसके लिए अपनी दैनिक क्रियाओं को बढ़ाने का प्रयास कीजिए, जैसे नित्य पैदल अवश्य चलना, अपनी शारीरिक एवम आयु की क्षमतानुसार योग/प्राणायाम करना, सीढ़ियाँ चढ़ना और उतरना,स्वयम के कार्य करना, आदि।
2. *उचित आहार* / Eat Right: भोजन करना मनुष्य की सबसे अधिक मौलिक आवश्यकताओं में से एक है। सक्रिय जीवनशैली के साथ स्वस्थ आहार लेना स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए सर्वश्रेष्ठ दवा है। वृद्धावस्था से रोगप्रतिरोधक तंत्र में परिवर्तन आता है और पोषक आहार से हम इसको स्वस्थ बनाये रख सकते हैं। वृद्धावस्था के बहुत से रोग अनुचित आहार के कारण होते हैं। यह सदा ध्यान में रखना चाहिए कि शरीर में आने वाले परिवर्तनों के साथ-साथ हमारी पोषण सम्बंधी आवश्यकताएँ भी बदलती हैं, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर को ऊर्जा (calorie) की आवश्यकता कम और पोषण (Nutrition)की आवश्यकता अधिक होती है। हमने 8 भागों मैं भोजन कब, कहाँ, कैसे,क्या, क्या न खायें एवम क्या अवश्य खाएं पर चर्चा की है।
3. *धूम्रपान न करें एवम मद्यपान में संयम रखें* / Don’t smoke and Drink in moderation-: धूम्रपान ऐसी मौतों का प्रमुख कारण है जिनको रोका जा सकता है। यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसको बंद करके आप अपने स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक सकारात्मक कार्य करेंगे। मद्यपान को बहुत संयमित करके भी आप अपने सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। चूंकि मद्यपान संयमित करना कठिन है, अतः सलाह दी जाती है कि इसका उपयोग ही न करें।
4. *तनाव प्रबन्धन करें* / Manage Stress : यदि तनाव समयपूर्व वृद्धत्व आने को तेज करता है, तो बुढ़ापा भी तनाव उत्पन्न करता है। तनाव जीवन में एक सामान्य कारक है। सभी उम्र के लोगों के लिए तनाव जीवन का एक हिस्सा है। लेकिन वरिष्ठ लोगों के लिए तनाव विशेष गम्भीर होने की संभावना है।सौभाग्य से, तनाव से मुकाबला करना संभव है, चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो। दो भागों में हम बढ़ती आयु के इस गम्भीर विषय को आपसे साझा कर चुके हैं।
5. *पर्याप्त नींद लें* / Get adequate sleep : नींद वह सुनहरी ज़ंजीर है जो स्वास्थ्य और हमारे शरीर को आपस में बांधे रखती नींद में गड़बड़ी होना किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य में कोई असाधारण परिवर्तन आने का पहला संकेत होता है। चार भागों में इस विषय पर लेखमाला में हम चर्चा कर चुके हैं।
वर्द्धावस्था या बुढापा जीवन की उस अवस्था को कहते हैं जिसमें उम्र मानव जीवन की औसत काल के समीप या उससे अधिक हो जाती है। वृद्ध लोगों को रोग लगने की अधिक सम्भावना होती है। उनकी समस्याएं भी अलग होती हैं। वृद्धावस्था एक धीरे-धीरे आने वाली अवस्था है जो कि स्वाभाविक व प्राकृतिक घटना है। वर्द्धावस्था की हमारी सामाजिक व्यवस्था मैं कुछ अलग ही समस्याएं है, जिनको हम निम्न प्रकार वर्गीकृत करके इन के निदान परअगली कड़ियों में विचार करेंगे। नीचे दिए जा रहे कारणों पर यदि हम गम्भीरता से विचार करें तो पाएंगे कि यही कुछ ऐसे कारण हैं जिनका प्रभाव, प्रभु के दिये वरदान स्वरूप हमारे स्वर्णिम समय पर पड़ता है। आवश्यकता है इनको जानने की एवं इनके कुप्रभावों से दूर रहने की।
1. पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव।
2. भौतिक वाद का जीवन में प्रसार।
3. सामाजिक व्यवस्था में तेजी से हो रहे परिवर्तन।
4. चिकित्सा सुविधा निरन्तर महंगी एवम अविश्वसनीय होते जाना।
5. असामान्य स्थितियों से जूझते हुए वरिष्ठ जन एवम कुछ बुजुर्गों की असाधारण आदतें।
6. सामाजिक सुरक्षा का अभाव।


इसके साथ साथ हम बीच बीच में इस आयु में बहुधा होने वाली अनेक बीमारियों पर भी चर्चा करते रहेंगे , जिनसे अधिकतर वयक्ति ग्रसित हो जाते हैं यथा बहीमूत्र/प्रोस्टेट समस्या, मौसम का प्रतिकूल प्रभाव, मानसिक अवसाद, घुटनों की समस्या, मल विसर्जन की समस्या इत्यादि
यदि किसी कारणवश आप यह पोस्ट नहीं देख पाते हैं, अथवा पुरानी पोस्टों का सन्दर्भ लेने के इच्छुक हैं तब ऐसी स्थिति में आप मेरे पर्सोनल ब्लॉग के निम्न लिंक पर जाकर अपनी सुविधानुसार पढ़ सकते हैं।

http://jagmohangautam.blogspot.in/?m=1

शालीनता से जीने की इस लेखमाला में मैंने उन अनुभवों को लिपिबद्ध किया है जो भारतीय परिस्थितियों में विगत अनेक वर्षों से अनेक परिवारों एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत करने वाले अनेक व्यक्तियों के अनुभव के आधार पर सुखमय जीवन व्यतीत करते हुए मैंने प्राप्त किये हैं। स्वस्थ रहने की परिकल्पना भातीय जीवन दर्शन का वह आधार है जिस पर चलते हुए हमारे पूर्वज अपने अनुभव के अनुसंधानों को आत्मसात करते हुए समस्त विज्ञान की इस धरोहर को अगली पीढ़ी को सौंप गए। इस लेखमाला की आगे की कड़ियाँ दोहराव से बचने एवम अधिक लोगो तक अपनी बात पहुंचाने के कारण इसकी भाषा आम बोल चाल की हिंदी रखी है।

यदि आप अपने सुझावों एवम अपने विचारों को जन हितार्थ हम तक पहुंचाएंगे तो लेख माला का सौभाग्य होगा। मेरे सम्पर्क निम्न हैं।
मोबाइल : 9910250284 / 7982584798
E mail : jagmohangautam@gmail.com
 धन्यवाद। --- जगमोहन गौतम

Friday, February 16, 2018

Important Health Tips You Should Know

कुछ जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए -

१. रोगी के रोग की चिकित्सा करने वाले निकृष्ट , रोग के कारणों की चिकित्सा करने वाले औसत और रोग-मुक्त रखने वाले श्रेष्ठ चिकित्सक होते हैं ।
                     ..... अष्टांग ह्रदयम्
२. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
३. हाई वी पी में -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।

४. लो वी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
५. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी ।
६. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं
७. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी ।
८. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
९. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें ।
१०. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें ।
११. जम्भाई - शरीर में आक्सीजन की कमी ।
१२. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
१३. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
१४.  किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
१५. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।

१६. अस्थमा , मधुमेह , कैसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।

१७. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
१८. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
१९. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
२०. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है ।
२१. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
२२. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
२३.  भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
२४.  HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
२५. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
२६.  चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है ।
२७.  शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
२८. वात के असर में नींद कम आती है ।
२९.  कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
३०. कफ के असर में पढाई कम होती है ।
३१. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है ।

३३.  आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
३४. शाम को वात-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
३५.  प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए ।
३६. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
३७. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
३८. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
३९. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
४०. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
४१.  भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
४२. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 43. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
४४. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
४५. छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।
४६. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
४७. मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
४८. सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
४९. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
५०. भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।
५१. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है ।
५२.  पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
५३.  छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
५४. रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
५५.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
५६. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
५७. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
५८. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
५९. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
६०. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
६१.  दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
६२.  गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।
६३.  जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए । जैसे - प्रेशर कूकर
६४.  गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।
६५.  गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
६६.  मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , ३-४ दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।

६७. रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।

६८. भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है ।
६९. भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
७०. अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है ।
७१. अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें ।

७२. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।

७३. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
७४. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।

७५.  बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।

७६. स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
७७. भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
७८. सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए ।
७९. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।

८०.  शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।
८१. मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।
८२. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।
८३. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।
८४. एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
८५. खाने की बस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
८६ .  रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग ।
८७ . छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए ।
८८. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।
८९.  बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
९०. चिंता , क्रोध , ईष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।
९१.  गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।

९२. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।

९३. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा ।
९४. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए ।
९५. जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
९६. सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
९७. स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है ।
९८ . तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है ।
९९. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।
१००. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,  इसे ना थूके ।
जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,  इसे ना थूकें ।


*(क्यों हैरान करता है इंसान का शरीर, वैज्ञानिकों को)*
अद्भुत है इंसान का शरीर

*जबरदस्त फेफड़े*
हमारे फेफड़े हर दिन 20 लाख लीटर हवा को फिल्टर करते हैं. हमें इस बात की भनक भी नहीं लगती. फेफड़ों को अगर खींचा जाए तो यह टेनिस कोर्ट के एक हिस्से को ढंक देंगे.

*ऐसी और कोई फैक्ट्री नहीं*
हमारा शरीर हर सेकंड 2.5 करोड़ नई कोशिकाएं बनाता है. साथ ही, हर दिन 200 अरब से ज्यादा रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है. हर वक्त शरीर में 2500 अरब रक्त कोशिकाएं मौजूद होती हैं. एक बूंद खून में 25 करोड़ कोशिकाएं होती हैं.

*लाखों किलोमीटर की यात्रा*
इंसान का खून हर दिन शरीर में 1,92,000 किलोमीटर का सफर करता है. हमारे शरीर में औसतन 5.6 लीटर खून होता है जो हर 20 सेकेंड में एक बार पूरे शरीर में चक्कर काट लेता है.

*धड़कन, धड़कन*
एक स्वस्थ इंसान का हृदय हर दिन 1,00,000 बार धड़कता है. साल भर में यह 3 करोड़ से ज्यादा बार धड़क चुका होता है. दिल का पम्पिंग प्रेशर इतना तेज होता है कि वह खून को 30 फुट ऊपर उछाल सकता है.

*सारे कैमरे और दूरबीनें फेल*
इंसान की आंख एक करोड़ रंगों में बारीक से बारीक अंतर पहचान सकती है. फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसका मुकाबला कर सके.

*नाक में एंयर कंडीशनर*
हमारी नाक में प्राकृतिक एयर कंडीशनर होता है. यह गर्म हवा को ठंडा और ठंडी हवा को गर्म कर फेफड़ों तक पहुंचाता है.

*400 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार*
तंत्रिका तंत्र 400 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से शरीर के बाकी हिस्सों तक जरूरी निर्देश पहुंचाता है. इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं.

*जबरदस्त मिश्रण*
शरीर में 70 फीसदी पानी होता है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कार्बन, जिंक, कोबाल्ट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, निकिल और सिलिकॉन होता है.

*बेजोड़ झींक*
झींकते समय बाहर निकले वाली हवा की रफ्तार 166 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है. आंखें खोलकर झींक मारना नामुमकिन है.

*बैक्टीरिया का गोदाम*
इंसान के वजन का 10 फीसदी हिस्सा, शरीर में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है. एक वर्ग इंच त्वचा में 3.2 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं.

*ईएनटी की विचित्र दुनिया*
आंखें बचपन में ही पूरी तरह विकसित हो जाती हैं. बाद में उनमें कोई विकास नहीं होता. वहीं नाक और कान पूरी जिंदगी विकसित होते रहते हैं. कान लाखों आवाजों में अंतर पहचान सकते हैं. कान 1,000 से 50,000 हर्ट्ज के बीच की ध्वनि तरंगे सुनते हैं.

*दांत संभाल के*
इंसान के दांत चट्टान की तरह मजबूत होते हैं. लेकिन शरीर के दूसरे हिस्से अपनी मरम्मत खुद कर लेते हैं, वहीं दांत बीमार होने पर खुद को दुरुस्त नहीं कर पाते.

*मुंह में नमी*
इंसान के मुंह में हर दिन 1.7 लीटर लार बनती है. लार खाने को पचाने के साथ ही जीभ में मौजूद 10,000 से ज्यादा स्वाद ग्रंथियों को नम बनाए रखती है.

*झपकती पलकें*
वैज्ञानिकों को लगता है कि पलकें आंखों से पसीना बाहर निकालने और उनमें नमी बनाए रखने के लिए झपकती है. महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी बार पलके झपकती हैं.

*नाखून भी कमाल के*
अंगूठे का नाखून सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ता है. वहीं मध्यमा या मिडिल फिंगर का नाखून सबसे तेजी से बढ़ता है.

*तेज रफ्तार दाढ़ी*
पुरुषों में दाढ़ी के बाल सबसे तेजी से बढ़ते हैं. अगर कोई शख्स पूरी जिंदगी शेविंग न करे तो दाढ़ी 30 फुट लंबी हो सकती है.

*खाने का अंबार*
एक इंसान आम तौर पर जिंदगी के पांच साल खाना खाने में गुजार देता है. हम ताउम्र अपने वजन से 7,000 गुना ज्यादा भोजन खा चुके होते हैं.

*बाल गिरने से परेशान*
एक स्वस्थ इंसान के सिर से हर दिन 80 बाल झड़ते हैं.

*सपनों की दुनिया*
इंसान दुनिया में आने से पहले ही यानी मां के गर्भ में ही सपने देखना शुरू कर देता है. बच्चे का विकास वसंत में तेजी से होता है.

*नींद का महत्व*
नींद के दौरान इंसान की ऊर्जा जलती है. दिमाग अहम सूचनाओं को स्टोर करता है. शरीर को आराम मिलता है और रिपेयरिंग का काम भी होता है. नींद के ही दौरान शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स निकलते हैं.

Monday, February 12, 2018

FACTS ABOUT VITAMIN D

*15 FACTS ABOUT VITAMIN D*

Vitamin D prevents Osteoporosis,
Depression,
Prostate cancer,
Breast cancer
and even effects -
Diabetes & Obesity..

Vitamin D is perhaps the single most *underrated nutrient* in the world of nutrition.

That's probably because it's free....
Your body makes it when sunlight touches your skin !!

Drug companies can't sell you sunlight, so there's no promotion of its health benefits..

The truth is, most people don't know the real story on
*vitamin D and health.*
 So here's an overview taken from an interview between Mike Adams and *Dr.Michael Holick*.

◆ 1. Vitamin D is *produced by your skin* in response to exposure to ultraviolet radiation *from natural sunlight*.

◆ 2. The healing rays of natural sunlight (that generate vitamin D in your skin) *cannot penetrate glass*.
So you don't generate vitamin D when sitting in your car or home.

◆ 3. It is nearly impossible to get adequate amounts of vitamin D from your diet. *Sunlight exposure is the only reliable way* to generate vitamin D in your own body.

◆ 4. A person would have to drink *ten tall glasses* of vitamin D fortified milk each day just to get minimum levels of vitamin D into their diet.

◆ 5. The further you live from the equator, the longer exposure you need to the sun in order to generate vitamin D. Canada, the UK and most U.S. States are far from the equator.

◆ 6. People with dark skin pigmentation may need 20 - 30 times as much exposure to sunlight as fair-skinned people to generate the same amount of vitamin D.
That's why prostate cancer is epidemic among black men -- it's a simple, but widespread, sunlight deficiency.

◆ 7. Sufficient levels of vitamin D are *crucial for calcium absorption* in your intestines. Without sufficient vitamin D, your body cannot absorb calcium, rendering calcium supplements useless.

◆ 8. Chronic vitamin D *deficiency cannot be reversed overnight*: it takes months of vitamin D supplementation and sunlight exposure to rebuild the body's bones and nervous system.

◆ 9. Even weak *sunscreens (SPF=8) block* your body's ability to generate vitamin D by 95%. This is how sunscreen products actually cause disease -by creating a critical vitamin deficiency in the body.

◆ 10. It is impossible to generate too much vitamin D in your body from sunlight exposure: your body will self-regulate and only generate what it needs.

◆ 11. If it hurts to press firmly on your sternum(chest/breast bone), you may be suffering from chronic vitamin D deficiency right now.

◆ 12. Vitamin D is "activated" in your body by your *kidneys and liver* before it can be used.

◆ 13. Having kidney disease or liver damage can greatly impair your body's ability to activate circulating vitamin D.

◆ 14. The sunscreen industry doesn't want you to know that your body actually needs sunlight exposure because that realization would mean lower sales of sunscreen products.

◆ 15. Even though vitamin D is one of the *most powerful healing chemicals in your body*, your body makes it absolutely free. No prescription required.

~ Other powerful *antioxidants* with this ability include the
super fruits like Pomegranates (POM Wonderful juice),
Acai, Blueberries, etc.

~ Diseases and conditions cause by vitamin D deficiency:

● Osteoporosis is commonly caused by a lack of vitamin D, which greatly impairs calcium absorption.

● Sufficient vitamin D prevents
prostate cancer,
breast cancer,
ovarian cancer,
depression,
colon cancer and
schizophrenia..

● "Rickets" is the name of a bone-wasting disease caused by vitamin D deficiency.

● Vitamin D deficiency may *exacerbate* type 2 diabetes and impair insulin production in the pancreas.

● Obesity impairs vitamin D utilization in the body, meaning obese people *need twice* as much vitamin D.

● Vitamin D is used around the world to treat *Psoriasis*(a chronic skin disease).

● Vitamin D deficiency can cause ~
schizophrenia.

● Seasonal Affective Disorder is caused by a melatonin imbalance initiated by lack of exposure to sunlight.

● Chronic vitamin D deficiency is often misdiagnosed as *fibromyalgia* because its symptoms are so similar: *muscle weakness, aches and pains*.

● Your risk of developing serious diseases like diabetes and cancer is *reduced 50% - 80%*  through simple, sensible exposure to natural *sunlight 2-3 times each week*.

● Infants who receive vitamin D supplementation (2000 units daily) have an *80% reduced risk* of developing *type 1 diabetes* over the next twenty years.

 
💥 Shocking Vitamin D deficiency statistics:

¶ 32% of doctors and med school students are vitamin D deficient.
¶ 40% of the U.S. population is vitamin D deficient.
¶ 42% of African American women of childbearing age are deficient in vitamin D.
¶ 48% of young girls (9-11 years old) are vitamin D deficient.
¶ Up to 60% of all hospital patients are vitamin D deficient.
¶ 76% of pregnant mothers are severely vitamin D deficient, causing widespread vitamin D deficiencies in their unborn children, which predisposes them to type 1 diabetes, arthritis, multiple sclerosis and schizophrenia later in life. 81% of the children born to these mothers were deficient.
¶ Up to 80% of nursing home patients are
vitamin D deficient❗❗

Great Information with No cost

Remedy For Fever

*बुखार का हौवा और उसका घरेलू उपचार*

बुखार सामान्य तौर पर सबको हर मौसम में हो जाने वाली शिकायत है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर में विकार एकत्र होने का लक्षण है। लेकिन किसी रोगी को बुखार आते ही उसके घरवाले घबड़ा जाते हैं और किसी भी तरह जल्दी से जल्दी बुखार उतारने में जुट जाते हैं। उनके मन में बुखार का हौवा इतनी बुरी तरह घर कर गया होता है कि बुखार उतारने के लिए तेज ऐलोपैथिक दवायें देने में भी संकोच नहीं करते, चाहे आगे चलकर उनसे भयंकर हानि क्यों न उठानी पड़े।

ऐलोपैथिक डाक्टर भी अपने स्वार्थ के लिए बुखार के हौवे को फैलाते हैं। हालाँकि वे बुखार आने का कोई कारण नहीं बता पाते। टालने के लिए कह देते हैं कि इन्फैक्शन है या वायरल फीवर है। साइड इफैक्ट की चिंता किये बिना वे बुखार उतारने की तेज दवायें रोगी को दे देते हैं, भले ही उनसे रोगी का जीवन संकट में पड़ जाये।

प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार वास्तव में बुखार कोई बीमारी नहीं, बल्कि दवा है। जब शरीर में विकार एक सीमा से अधिक एकत्र हो जाते हैं और किसी अन्य रूप में नहीं निकल पाते, तो प्रकृति उन्हें अन्दर ही अन्दर जलाने का प्रयास करती है। इसी से शरीर का तापमान बढ़ जाता है। यदि हम प्रकृति के इस कार्य में सहयोग करें और बाहर से नये विकार न डालें, तो पुराने विकार जल जाने के बाद बुखार अपने आप ठीक हो जाता है। बुखार इस बात का परिचायक है कि शरीर में जीवनी शक्ति है और सक्रिय भी है। यह एक अच्छा लक्षण है।

यदि हम बुखार को स्वाभाविक रूप से निकलने दें, तो वह शरीर को स्वस्थ करके स्वयं ही चला जाता है। इसके विपरीत उसे दवाओं से दबा देने पर विकार किसी नये और अधिक भयंकर रूप में निकलने लगते हैं। गोलियाँ खाकर बुखार को दबा देना ठीक वैसा ही है जैसे आग में पानी डालना। इससे उस समय तो आग बुझ जाती है, लेकिन जिस ईंधन (अर्थात् विकार) के कारण आग लगी थी वह शरीर में ही रुका रहता है और आगे चलकर बहुत परेशान करता है। प्रायः यह देखा गया है कि गोलियाँ खाकर दबाया गया बुखार कुछ घंटे या कुछ दिन बाद और अधिक तीव्रता से आ जाता है, जिससे रोगी के जीवन को ही खतरा उत्पन्न हो जाता है।

बुखार की चिकित्सा उसकी तीव्रता के अनुसार करनी चाहिए। सबसे पहली बात तो यह है कि बुखार चाहे कम हो या अधिक रोगी को बुखार आते ही उपवास प्रारम्भ कर देना चाहिए। बुखार रहने तक और उसके एक दिन बाद तक भी रोगी को केवल उबाला हुआ पानी ठंडा करके या गुनगुना पिलाना चाहिए। इस बीच उसे खाने को कुछ न दिया जाय तो बेहतर है, क्योंकि बुखार में भूख वैसे भी नहीं लगती। लेकिन यदि भूख लगी हो और कुछ देना ही हो, तो मौसमी फलों का रस या सब्जियों का सूप कम मात्रा में देना चाहिए। बुखार के रोगी को दूध और उससे बनी हुई कोई वस्तु देना बहुत हानिकारक है। इसके स्थान पर पतला दलिया या दाल का पानी दिया जा सकता है।

यदि बुखार 100 डिग्री तक हो तो चिन्ता की कोई बात नहीं है। ऐसा बुखार स्वास्थ्य के लिए एक प्रकार से लाभदायक होता है, क्योंकि वह शरीर के विकारों को भस्म कर देता है। इसलिए उसे अपने आप उतरने देना चाहिए। ऐसा बुखार कुछ न करने पर और केवल उपवास करने पर दो या तीन दिन में अपने आप चला जाता है। यदि आप इसके साथ दिन में दो या तीन बार पेड़ू पर ठंडे पानी की पट्टी 15-20 मिनट तक रखें, तो रोगी को बहुत आराम मिलता है।

यदि शरीर का तापमान 100 डिग्री से अधिक हो, तो रोगी को अनिवार्य रूप से पूर्ण उपवास कराना चाहिए और केवल उबाला हुआ पानी ठंडा करके पीने के लिए देना चाहिए। इसके साथ ही प्रत्येक दिन शरीर को गर्म पानी से पोंछना और पेड़ू पर ठंडे पानी की पट्टी दिन में दो या तीन बार 15-20 मिनट तक रखना आवश्यक है।

यदि बुखार का तापमान 102 डिग्री या उससे अधिक हो, तो सिर को भी गर्मी से बचाना आवश्यक है, ताकि बुखार का कुप्रभाव दिमाग पर न पड़े। इसके लिए पेड़ू के साथ-साथ माथे पर भी ठंडे पानी की पट्टी अवश्य रखनी चाहिए। ऐसी पट्टी तब तक रखनी चाहिए जब तक तापमान कम न हो जाये। कई बार आधा-आधा घंटे तक पट्टी रखनी पड़ती है।

बुखार में प्रत्येक दिन रोगी का शरीर गुनगुने पानी में गीले किये हुए कपड़े से रगड़कर पोंछ देना चाहिए। इसकी विधि यह है कि एक भगौने में गर्म पानी लें और दूसरे में साधारण। अब एक रूमाल जैसे तौलिये को गर्म पानी में भिगोकर हलका निचोड़ लें और उससे किसी एक अंग जैसे एक हाथ, या एक पैर, या सिर या पेट या पीठ को रगड़कर पोंछ दें। इसके तुरन्त बाद उस अंग को एक सूखे तौलिये से पोंछकर पानी साफ कर दें। अब गीले तौलिये को सादा पानी में खूब धोकर निचोड़ लें और फिर उसे गर्म पानी में गीला करके कोई दूसरा अंग पोंछें। इस तरह करते हुए पूरे शरीर को पोंछ देना चाहिए। अन्त में रोगी को साफ धुले हुए ढीले कपड़े पहना देने चाहिए।

इस तरह गर्म पानी में भीगी तौलिया से रगड़ने पर शरीर के सभी रोम छिद्र खुल जाते हैं और विकारों को पसीने के रूप में निकलने का मार्ग मिल जाता है। इससे बुखार में बहुत लाभ होता है और रोगी को नींद भी अच्छी आती है।

बुखार में रोगी को प्रायः भूख नहीं लगती। इसलिए उसका भोजन तुरंत बंद कर देना चाहिए। इसके बजाय उबला हुआ पानी सादा ही या गुनगुना करके हर घंटे पर एक गिलास पीते रहना चाहिए और समय-समय पर मूत्र विसर्जन के लिए भी अवश्य जाना चाहिए।

यदि रोगी को भूख लग रही है, तो प्रारम्भ में केवल फलों का ताजा रस या सब्जियों का सूप या दाल का पानी देना चाहिए। चाय, दूध तथा उससे बने पदार्थों का सेवन बुखार में करना उचित नहीं।

यदि रोगी को भूख अधिक लग रही है, तो उसे ताजे प्राकृतिक फल या उबली सब्जी या दलिया दिया जा सकता है। बुखार उतर जाने और भूख वापस आने पर ही हल्का साधारण भोजन देना चाहिए।

बुखार में प्रायः पूरे शरीर में दर्द रहता है। यह स्वाभाविक है। इसलिए केवल आराम करना चाहिए और किसी भी हालत में कोई दर्दनाशक दवा नहीं देनी चाहिए।

चिकनगुनिया आदि में शरीर पर लाल चकते या दाने पड़ जाते हैं। वे भी अपने आप दो तीन दिन में चले जाते हैं। यदि उनमें बहुत खुजली हो रही हो, तो वहां बर्फ लगायी जा सकती है।

इस प्रकार इलाज करने से कैसा भी बुखार हो, चार-पाँच दिन या अधिक से अधिक एक सप्ताह में अवश्य चला जाता है और रोगी को अधिक कमजोरी भी अनुभव नहीं होती। इसके विपरीत रोगी बुखार उतर जाने के बाद काफी स्वस्थ अनुभव करता है। बुखार के इलाज में मूल मंत्र यह है कि यह धीरे-धीरे आता है और धीरे-धीरे ही जाना चाहिए। एकदम से बुखार चढ़ना और एकदम से उतरना दोनों ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं।

-- *विजय कुमार सिंघल*
फाल्गुन कृ १२, सं. २०७४ वि. (१२ फ़रवरी, २०१८)

  *AGEING GRACEFULLY*

     --Jagmohan Gautam


(Gist of series covered in sixteen parts. Today we are taking gist of Part XVI)

 

*Get Adequate Sleep* .......4

------Indian system of Biological Clock for Eating,Working, Sleeping and Waking etc as per  *Ayurved.*

------Is there a best time to sleep and awake.

------What if you sleep late and wake up late.


*The Ayurvedic Body Clock:* Organs and Dosha Alignment with Time

According to Ayurveda, our body is completely aligned with the times of day in regards to our vital organs.  Every hour is related to a specific organ(s), and therefore the organ will be at its most powerful energy at its respective times.  Further, the time each organ is spiking can reveal to us the best time for treatment, as well as the mostly likely time an imbalance may occur.  Knowing one’s internal body clock can help us align our daily activities in order to allow optimal functioning and therefore optimal health.

Another essential aspect of the Ayurvedic Body Clock is the relation of dosha to each hour as well.  These energetic forces will be at their strongest point during their peak times.  Just as with the organ times, we can use this knowledge to reveal to us the best times for doshic treatment, the most likely time for doshic imbalance, and the best times for certain daily activities.  For example, it is best to eat your largest meal mid-day, as this is the time Pitta is at its strongest.  Alternatively, the dinner meal should be much smaller and lighter, since Kapha is spiking at this time.  Similarly, it is always best to wake up by 6am, as this is the time of Vata.  If you wait too long and oversleep, you will wake up during Kapha’s peak hours in which you may experience heaviness, laziness and lethargy.   

*According to ayurvedic principles, the best time to go to bed is right around, or just before, 10:00 p.m., when Kapha gives way to Pitta. *

*Is there a best time to sleep?*-- There is a saying that sleeping early and waking up early is good for your health. How true is that? Is it alright to sleep late and wake up late?

You actually has an amazing biological clock ticking inside your body. It is very precise. It helps to regulate your various body functions including your sleeping time.

From 11pm to 3am, most of your blood circulation concentrates in your liver. Your liver gets larger when filled with more blood. This is an important time when your body undergoes detoxification process. Your liver neutralizes and breaks down body toxins accumulated throughout the day.

However if you don’t sleep at this time, your liver cannot carry out this detoxification process smoothly.

If you sleep at 11pm, you have full 4 hours to detoxify your body.If you sleep at 12am, you have 3 hours.If you sleep at 1am, you have 2 hours.And if you sleep at 2am, you only have 1 hour to detoxify.

What if you sleep after 3am? Unfortunately, you won’t have any time to actually detoxify your body. If you continue with this sleeping pattern, these toxins will accumulate in your body over time. You know what happens next.

*What if you sleep late and wake up late?*

Have you tried going to bed very late at night? Did you realize you feel very tired the next day no matter how much you sleep?

Sleeping late and waking up late is indeed very bad for your health. Besides not having enough time to detoxify your body, you will miss out other important body functions too.

From 3am to 5am, most blood circulation concentrates in your lung. What should you do at this moment? Well, you should exercise and breathe in fresh air. Take in good energy into your body, preferably in a garden. At this time, the air is very fresh with lots of beneficial negative ions.

From 5am to 7am, most blood circulation concentrates in your large intestine. What should you do at this moment? You should poop! Pass out all unwanted poop from your large intestine. Prepare your body to absorb more nutrients throughout the day.

From 7am to 9am, most blood circulation concentrates in your stomach. What should you do at this moment? Have your breakfast! This is your most important meal in a day. Make sure you have all the required nutrients from your breakfast. Not having breakfast causes lotsssssss of health problems for you in the future.

That’s the way to start your day

There you are… the most ideal way to start your day. After fully detoxifying your blood during your sleep, you wake up fresh to inhale beneficial energy. Then you pass out unwanted poop from your large intestine. After that, you take in balanced nutrients to prepare your body for a new day.

*No wonder people living in villages or farms is healthier. They sleep early and wake up early. They follow their natural biological clock.*

Living in city, we have more difficulty in following this sleeping schedule. 

But once I know the importance of our biological clock, I’ll try my best to follow it. If I wake up early, I usually start my day early in comparison to those who wakes up late. But when I see the clock shows 7am, I know it’s the best time for breakfast. So I’ll try to have my breakfast before 9am for best absorption.


Try to follow this timing as close as possible. I’m sure you will feel fresher and more energetic all day long.

I believe after going through four publication on sleep, you can very well understand it's importance in golden period of life which is gifted to you by Almighty.

Tuesday, February 6, 2018

A Few First Aid Tips

*please verify following information  from your family doctor and if found helpful in distress, you should share this useful information on saving lives! It's a way to do good*!

Please pass this on, as it is not only teach other people, but could save yourself too!

Ways to save a life:

1. *Choking - Just lift up your arms.*
In New Jersey, US, a 5 years old boy, cleverly saved his grandmother's life, with a very simple method, by raising the arms!
His 56 years old grandma Dilihua was at home watching TV while eating fruits.
When she turned her head, a piece of fruit got stuck in her throat. She tried to press on her chest to dislodge it, but it doesn't help. When the boy asked: "Grandma, are you choking?", she could not answer.
"I think you are choking Grandma, raise your hands, raise your hands."
The Grandma did as he said, and really managed to spit out the fruit!
Her grandson was very calm, and said it was something he learned in school.

2. *Body aches upon waking.*
Do you wake up in the morning and find yourself experiencing body aches? Does your neck feel sore and painful? What should you do if you experience these symptoms?
Just lift your feet up!

Pull your big toes outwards, and slowly massage and rotate in a clockwise or counterclockwise direction!

3. *Foot/Leg Cramps.*
When you have a cramp in your left foot, raise your right arm as high as possible.
When you have a cramp in your right foot, raise your left arm. This will soothe immediately.

4. *Feet Numbness*.
If your left foot becomes numb, swing your your right hand out forcefully.
If your right foot is numb, then swing your left hand.

【Three rescue methods】

1. *Half Body Paralysis*.(regardless due to brain hemorrhage or clogged blood vessels), half side face drooping. Immediately take a sewing needle and puncture the patient's earlobes at the lowest point, then squeeze out a drop of blood on each side. The sufferer will be immediately cured, and will not have any lasting symptoms.

2. *Heart Stopped Due to Heart Attack*.
Immediately take off the patient socks, and with a sewing needle puncture each one of the person's ten toes, squeezing a drop of blood out. The patient will then wake up.

3. *When the Patient has Difficulty in Breathing* - regardless whether due to asthma or acute laryngitis, etc., until they start to turn red, quickly puncture the tip of the nose with a needle and squeeze out two drops of black blood.

The above three methods are not dangerous at all, and can be performed within 10 seconds. Do a good deed and share it with friends! I did! Not only can you share knowledge, but youv could also save a life! 👍👍👍

Dr. Viren

*AGEING GRACEFULLY*              --Jagmohan Gautam


(Gist of series covered in sixteen parts. Today we are taking gist of Part XV)



    *GET ADEQUATE SLEEP*  (contd.- 3)

---Some breathing exercise for getting sound sleep.
---Sleep as per Body Clock.

---Noble Prize 2017 for research on Biological Clock for importance of getting sleep.


  *Breathing Exercise for Sound Sleep*

Yoga makes us mental and emotionally quiet. It is necessary for a good sleep to have mental peace. Through pranayama, we improve the rhythm of our breath.

The mere 11 minutes of breathing exercises can make our sleep better and more comfortable.

Take 1 to 3 minutes long and deep breath from the stomach.

Then open arms at 60 degrees for next 2 minutes. your palms are spread out.

For next 2 minutes, spread the arms completely. Your wrist should also be flat.

Combine your two palms for 2 minutes. Now keep your both palms in your lap for next 2 minutes. Remember your both palms should be directing upward. Below the left palm and the right palm on top of it. Both thumbs are touching each other.


*This exercise increases the time and quality of sleep, and one sleeps immediately after going to bed.*


  *What is the body clock?*

All animals and plants have a built-in circadian rhythm, The brain’s internal circadian clock is also known as the biological clock, body clock, circadian pacemaker, circadian system, circadian oscillator, etc.

The body's "biological clock," or 24-hour cycle (circadian rhythm), can be affected by light or darkness, which can make the body think it is time to sleep or wake up. The 24-hour body clock controls functions such as:-

Sleeping and waking. Body temperature. The balance of body fluids.                      Other body functions, such as when you feel hungry.

When it comes to healthy living, there’s no shortage of competing views on how to fight flab, run faster, sleep sounder and feel happier.

But what if when you exercise — and eat and sleep — is just as important as how?

*Mounting evidence suggests that our bodies perform differently at different times of the day. Like all living things, we have an internal clock that affects our hormonal responses, body temperature, heart rate and sleep cycles.* It’s determined by something called circadian rhythms, which follow the 24-hour pattern of the Earth’s rotation.

This year (2017) Nobel Prize in physiology or medicine was awarded  to three Americans who helped elucidate the rhythm of life, pinpointing some of the biological mechanisms that keep our internal body clocks ticking away.  Their discoveries about the body's daily rhythms, opening up whole new fields of research and raising awareness about the importance of getting proper sleep


 Rishi and Munis since Aadi Kaal (ancient period) in Indian traditions were having the practical knowledge of Biological Clock and accordingly introduced Life Style to be adopted everyone.

*According to Ayurveda, our body is completely aligned with the times of day in regards to our vital organs.*  Every hour is related to a specific organ(s), and therefore the organ will be at its most powerful energy at its respective times.

In  concluding publication of 'Get Adequate Sleep', under series "AGEING GRACEFULLY" we will come out with Indian system of Biological Clock for Eating, Working,Sleeping and Waking etc along with guidelines with reasonings on healthy Sleep regime

Thanks

  *शालीन वृद्धावस्था (भाग १५)*


मूल श्री जगमोहन गौतम द्वारा अंग्रेजी में लिखित एवम इसका हिंदी अनुवाद श्री विजय कुमार सिंघल द्वारा।

(Hindi Translation of Gist of "Ageing Gracefully" part 15)


  *पर्याप्त नींद लें (जारी....3)*



  *गहरी नींद के लिए श्वांस व्यायाम*

योग हमें मानसिक और भावनात्मक शांति देता है। अच्छी नींद के लिए मानसिक शांति होना आवश्यक है। प्राणायाम से हम अपनी साँस लेने की लय को सुधार सकते हैं।

केवल ११ मिनट के श्वाँस व्यायाम से हम अपनी निद्रा को बेहतर और अधिक आरामदायक बना सकते हैं।

- पेट से १ से ३ मिनट तक लम्बी और गहरी साँस लीजिए।
- अगले २ मिनट के लिए हाथों को ६० अंश पर खोलिए। आपकी हथेलियाँ फैली रहेंगी।
- अगले २ मिनट तक हाथों को पूरी तरह फैला लीजिए। आपकी कलाइयाँ सपाट होनी चाहिए।
- अब २ मिनट के लिए अपनी हथेलियों को मिला लीजिए।
- अगले २ मिनट के लिए अपनी दोनों हथेलियों को अपनी गोद में रखिए। ध्यान रखें कि दोनों हथेलियाँ ऊपर की ओर खुली रहेंगी। बायीं हथेली नीचे रहेगी और दायीं हथेली उसके ऊपर। दोनों अँगूठे एक दूसरे को छूते रहेंगे।

इस अभ्यास से नींद की अवधि और गुणवत्ता बढ़ जाती है और बिस्तर पर जाते ही तत्काल नींद आ जाती है।

(*अनुवादक की टिप्पणी*- यदि सोने से ठीक पहले २-३ मिनट तक ब्रह्मचर्यासन एवम भ्रामरी प्राणायाम कर लिया जाये, तो बहुत अच्छी नींद आती है।)

*शरीर घड़ी (body clock) क्या है?*

सभी पशुओं और पौधों में एक पूर्व निर्मित चक्रीय लय (circadian rhythm) होती है। मस्तिष्क की आन्तरिक चक्रीय घड़ी को जैविक घड़ी (biological clock), शरीर घड़ी (body clock), चक्रीय गतिनियंत्रक (circadian pacemaker), चक्रीय तंत्र (circadian system), चक्रीय ऑसीलेटर (circadian oscillator) आदि नामो से भी जाना जाता है।

शरीर की जैविक घड़ी या २४-घंटे का चक्र (चक्रीय लय) प्रकाश अथवा अँधेरे से प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर सोच सकता है कि सोने या जगने का समय हो गया है। २४-घंटे की शरीर घड़ी निम्नलिखित कार्यों को नियंत्रित करती है-
- सोना और जगना
- शरीर का तापमान
- शरीर के द्रव्यों का संतुलन
- भूख लगना आदि शरीर के अन्य कार्य

जब स्वास्थ्यप्रद जीवनचर्या की बात होती है, तो मोटापे से लड़ें, तेज चलें, गहरी नींद लें, प्रसन्न रहें आदि विषयों पर अनेक प्रकार की राय देने वालों की कमी नहीं होती। लेकिन आप क्या व्यायाम करें, क्या खायें, कैसे सोयें से ये समस्त क्रियाएं "कब करें" भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।

अनेक प्रमाणों से ज्ञात हुआ है कि हमारा शरीर दिन के भिन्न-भिन्न समयों पर भिन्न-भिन्न प्रकार से व्यवहार करता है। सभी प्राणियों की तरह हमारे शरीर में भी एक  आंतरिक घड़ी होती है, जो हमारे हार्मोनों के व्यवहार, शरीर के तापमान, हृदय गति और निद्रा चक्र को प्रभावित करती है। इसका निर्धारण चक्रीय लय (circadian rhythms) द्वारा किया जाता है, जो पृथ्वी के घूमने के २४ घंटे के चक्र का पालन करते हैं।

चिकित्सा या औषधि विज्ञान के क्षेत्र में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार तीन अमेरिकियों के दिया गया है, जिन्होंने जीवन की लय को स्पष्ट करने में सहायता की है। उन्होंने कुछ ऐसे जैविक तंत्रों की खोज की है जो हमारी आंतरिक शारीरिक घड़ी को गतिमान रखते हैं। शरीर की दैनिक लय के बारे मैं उनकी खोजों ने शोध के लिए एक पूरा नया क्षेत्र ही खोल दिया है और उचित निद्रा लेने की आवश्यता के बारे में जागरूकता बढ़ायी है।

भारतीय परम्परा में प्राचीन काल से हमारे ऋषि-मुनियों को जैविक घड़ी का व्यावहारिक ज्ञान था और उसके अनुसार ही उन्होंने सभी के लिए अपनाने योग्य जीवन शैली का निर्धारण किया था।

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर के विभिन्न आवश्यक अंग दिन के विभिन्न समयों से पूरी तरह समंजित हैं. समय का प्रत्येक घंटा हमारे किसी विशेष अंग या अंगों से सम्बंधित है और इसीलिए उन समयों में उन अंगों की ऊर्जा अधिकतम होती है।

इस लेखमाला "शालीन वृद्धावस्था" के अन्तर्गत "पर्याप्त नींद लें" विषय पर अन्तिम कड़ी के रूप में हम खाने, कार्य करने, सोने और जागने आदि के लिए जैविक घड़ी की भारतीय प्रणाली की चर्चा करेंगे और स्वास्थ्यप्रद नींद के लिए मार्गदर्शन भी देंगे।

Saturday, February 3, 2018

Cough and Cold

*जुकाम की प्राकृतिक चिकित्सा*

जुकाम का कारण है शरीर में काफी मात्र में कफ एकत्र हो जाना. यदि उसके साथ खांसी भी हो तो उसका कारण होता है कफ के साथ ही पुराना क़ब्ज़ होना। यदि उसके साथ छींकें भी आ रही हों तो उसका कारण है श्वांस नली में रुकावट आना। इन सबका इलाज मोटे तौर पर एक जैसा ही है। शरीर से कफ को निकालना और रुकावटों को दूर करना पहली आवश्यकता है।

इन शिकायतों को दूर करने के लिए निम्नलिखित कार्य करें-

१. सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर और एक चम्मच शहद मिलाकर पियें। फिर ५ मिनट बाद शौच जायें।

२. शौच के बाद २-३ मिनट तक पेडू पर खूब ठंडे पानी में तौलिया भिगोकर पोंछा लगायें और उसके बाद डेढ़-दो किमी या आधा-पौन घंटा तेज़ चाल से टहलें।

३. टहलने के बाद कफ को निकालने और श्वांस नली की रुकावटें दूर करने के लिए ५ मिनट भस्त्रिका, ५ मिनट कपालभाति और ५ मिनट अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें।

४. दिन भर में साढ़े तीन-चार लीटर सादा या गुनगुना पानी पियें। यानी हर घंटे पर एक पाव। जितनी बार पानी पियेंगे उतनी बार पेशाब आयेगा। उसे रोकना नहीं है।

५. रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी से लें।

६. परहेज़- फ्रिज का ठंडा पानी, चिकनाई, चीनी तथा कफ कारक वस्तुएँ। अगर चाय छोड़ सकें तो बेहतर, नहीं तो उसके स्थान पर ग्रीन टी पियें।

७. नाक या गले से जो बलगम निकल रहा हो उसको निकालते जायें और रूमाल से पोंछते जाएँ. भूलकर भी उसे वापस न खींचें.

इस कार्यक्रम का पालन करने से कैसा भी जुकाम, खाँसी आदि हो, केवल एक-दो सप्ताह में जड़ से समाप्त हो जायेगा.

-- *विजय कुमार सिंघल*
आषाढ़ शुक्ल ४, सं. २०७३ वि. (८ जुलाई २०१६)

Dangers Of Refined Oil

सबसे ज्यादा मौतें देने वाला भारत में कोई है l
तो वह है...
               *रिफाईनड तेल*

 केरल आयुर्वेदिक युनिवर्सिटी आंफ रिसर्च केन्द्र के अनुसार, हर वर्ष 20 लाख लोगों की मौतों का कारण बन गया है... *रिफाईनड तेल*

आखिर भाई राजीव दीक्षित जी के कहें हुए कथन सत्य हो ही गये!

रिफाईनड तेल से *DNA डैमेज, RNA नष्ट, , हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉकेज, ब्रेन डैमेज, लकवा शुगर(डाईबिटीज), bp नपुंसकता *कैंसर* *हड्डियों का कमजोर हो जाना, जोड़ों में दर्द,कमर दर्द, किडनी डैमेज, लिवर खराब, कोलेस्ट्रोल, आंखों रोशनी कम होना, प्रदर रोग, बांझपन, पाईलस, स्केन त्वचा रोग आदि!. एक हजार रोगों का प्रमुख कारण है।*

*रिफाईनड तेल बनता कैसे हैं।*

बीजों का छिलके सहित तेल निकाला जाता है, इस विधि में जो भी Impurities तेल में आती है, उन्हें साफ करने वह तेल को स्वाद गंध व कलर रहित करने के लिए रिफाइंड किया जाता है
*वाशिंग*-- वाशिंग करने के लिए पानी, नमक, कास्टिक सोडा, गंधक, पोटेशियम, तेजाब व अन्य खतरनाक एसिड इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि Impurities इस बाहर हो जाएं |इस प्रक्रिया मैं तारकोल की तरह गाडा वेस्टेज (Wastage} निकलता है जो कि टायर बनाने में काम आता है। यह तेल ऐसिड के कारण जहर बन गया है।

*Neutralisation*--तेल के साथ कास्टिक या साबुन को मिक्स करके 180°F पर गर्म किया जाता है। जिससे इस तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

*Bleaching*--इस विधी में P. O. P{प्लास्टर ऑफ पेरिस} /पी. ओ. पी. यह मकान बनाने मे काम ली जाती है/ का उपयोग करके तेल का कलर और मिलाये गये कैमिकल को 130 °F पर गर्म करके साफ किया जाता है!

*Hydrogenation*-- एक टैंक में तेल के साथ निकोल और हाइड्रोजन को मिक्स करके हिलाया जाता है। इन सारी प्रक्रियाओं में तेल को 7-8 बार गर्म व ठंडा किया जाता है, जिससे तेल में पांलीमर्स बन जाते हैं, उससे पाचन प्रणाली को खतरा होता है और भोजन न पचने से सारी बिमारियां होती हैं।
*निकेल*एक प्रकार का Catalyst metal (लोहा) होता है जो हमारे शरीर के Respiratory system,  Liver,  skin,  Metabolism,  DNA,  RNA को भंयकर नुकसान पहुंचाता है।

रिफाईनड तेल के सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं और ऐसिड (कैमिकल) मिल जाने से यह भीतरी अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

जयपुर के प्रोफेसर श्री राजेश जी गोयल ने बताया कि, गंदी नाली का पानी पी लें, उससे कुछ भी नहीं होगा क्योंकि हमारे शरीर में प्रति रोधक क्षमता उन बैक्टीरिया को लडकर नष्ट कर देता है, लेकिन रिफाईनड तेल खाने वाला व्यक्ति की अकाल मृत्यु होना निश्चित है!

*दिलथाम के अब पढे*

*हमारा शरीर करोड़ों Cells (कोशिकाओं) से मिलकर बना है, शरीर को जीवित रखने के लिए पुराने Cells नऐ Cells से Replace होते रहते हैं नये Cells (कोशिकाओं) बनाने के लिए शरीर खुन का उपयोग करता है, यदि हम रिफाईनड तेल का उपयोग करते हैं तो खुन मे Toxins की मात्रा बढ़ जाती है व शरीर को नए सेल बनाने में अवरोध आता है, तो कई प्रकार की बीमारियां जैसे* -— कैंसर *Cancer*,  *Diabetes* मधुमेह, *Heart Attack* हार्ट अटैक, *Kidney Problems* किडनी खराब,
*Allergies,  Stomach Ulcer,  Premature Aging,  Impotence,  Arthritis,  Depression,  Blood pressure आदि हजारों बिमारियां होगी।*

 रिफाईनड तेल बनाने की प्रक्रिया से तेल बहुत ही मंहगा हो जाता है, तो इसमे पांम आंयल मिक्स किया जाता है! (पांम आंयल सवमं एक धीमी मौत है)

*सरकार का आदेश*--हमारे देश की पॉलिसी अमरिकी सरकार के इशारे पर चलती है। अमरीका का पांम खपाने के लिए,मनमोहन सरकार ने एक अध्यादेश लागू किया कि,
प्रत्येक तेल कंपनियों को 40 %
खाद्य तेलों में पांम आंयल मिलाना अनिवार्य है, अन्यथा लाईसेंस रद्द कर दिया जाएगा!
इससे अमेरिका को बहुत फायदा हुआ, पांम के कारण लोग अधिक बिमार पडने लगे, हार्ट अटैक की संभावना 99 %बढ गई, तो दवाईयां भी अमेरिका की आने लगी, हार्ट मे लगने वाली  स्प्रिंग(पेन की स्प्रिंग से भी छोटा सा छल्ला) , दो लाख रुपये की बिकती हैं,
यानी कि अमेरिका के दोनो हाथों में लड्डू, पांम भी उनका और दवाईयां भी उनकी!

*अब तो कई नामी कंपनियों ने पांम से भी सस्ता,, गाड़ी में से निकाला काला आंयल* *(जिसे आप गाडी सर्विस करने वाले के छोड आते हैं)*
*वह भी रिफाईनड कर के खाद्य तेल में मिलाया जाता है, अनेक बार अखबारों में पकड़े जाने की खबरे आती है।*

सोयाबीन एक दलहन हैं, तिलहन नही...
दलहन में... मुंग, मोठ, चना, सोयाबीन, व सभी प्रकार की दालें आदि होती है।
तिलहन में... तिल, सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम आदि आती है।
अतः सोयाबीन तेल ,  पेवर पांम आंयल ही होता है। पांम आंयल को रिफाईनड बनाने के लिए सोयाबीन का उपयोग किया जाता है।
सोयाबीन की एक खासियत होती है कि यह,
प्रत्येक तरल पदार्थों को सोख लेता है,
पांम आंयल एक दम काला और गाढ़ा होता है,
उसमे साबुत सोयाबीन डाल दिया जाता है जिससे सोयाबीन बीज उस पांम आंयल की चिकनाई को सोख लेता है और फिर सोयाबीन की पिसाई होती है, जिससे चिकना पदार्थ तेल तथा आटा अलग अलग हो जाता है, आटा से सोया मंगोडी बनाई जाती है!
आप चाहें तो किसी भी तेल निकालने वाले के सोयाबीन ले जा कर, उससे तेल निकालने के लिए कहे!महनताना वह एक लाख रुपये  भी देने पर तेल नही निकालेगा, क्योंकि. सोयाबीन का आटा बनता है, तेल नही!

फॉर्च्यून.. अर्थात.. आप के और आप के परिवार के फ्यूचर का अंत करने वाला.

सफोला... अर्थात.. सांप के बच्चे को सफोला कहते हैं!
*5 वर्ष खाने के बाद शरीर जहरीला
10 वर्ष के बाद.. सफोला (सांप का बच्चा अब सांप बन गया है.
*15 साल बाद.. मृत्यु... यानी कि सफोला अब अजगर बन गया है और वह अब आप को निगल जायगा.!*

*पहले के व्यक्ति 90.. 100 वर्ष की उम्र में मरते थे तो उनको मोक्ष की प्राप्ति होती थी, क्योंकि.उनकी सभी इच्छाए पूर्ण हो जाती थी।*

*और आज... अचानक हार्ट अटैक आया और कुछ ही देर में मर गया....?*
*उसने तो कल के लिए बहुत से सपने देखें है, और अचानक मृत्यु..?*
अधुरी इच्छाओं से मरने के कारण.. प्रेत योनी मे भटकता है।

*राम नही किसी को मारता.... न ही यह राम का काम!*
*अपने आप ही मर जाते हैं.... कर कर खोटे काम!!*
गलत खान पान के कारण, अकाल मृत्यु हो जाती है!

*सकल पदार्थ है जग माही..!*
*कर्म हीन नर पावत नाही..!!*
अच्छी वस्तुओं का भोग,.. कर्म हीन, व आलसी व्यक्ति संसार की श्रेष्ठ वस्तुओं का सेवन नहीं कर सकता!

*तन मन धन और आत्मा की तृप्ति के लिए सिर्फ कच्ची घाणी का तेल, तिल सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम आदि का तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए!* पोस्टीक वर्धक और शरीर को निरोग रखने वाला सिर्फ कच्ची घाणी का निकाला हुआ तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए!
आज कल सभी कम्पनी.. अपने प्रोडक्ट पर कच्ची घाणी का तेल ही लिखती हैं!
वह बिल्कुल झूठ है.. सरासर धोखा है!
कच्ची घाणी का मतलब है कि,, लकड़ी की बनी हुई, औखली और लकडी का ही मुसल होना चाहिए! लोहे का घर्षण नहीं होना चाहिए. इसे कहते हैं.. कच्ची घाणी.
जिसको बैल के द्वारा चलाया जाता हो!
आजकल बैल की जगह मोटर लगा दी गई है!
लेकिन मोटर भी बैल की गती जितनी ही चले!
लोहे की बड़ी बड़ी सपेलर (मशिने) उनका बेलन लाखों की गती से चलता है जिससे तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वे लिखते हैं.. कच्ची घाणी...

जनहित में जारी:-
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत्त जोधपुर प्रान्त।
🌿🌿
जागो ग्राहक जागो🌿🌿

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*शालीन वृद्धावस्था (भाग १४)*

मूल श्री जगमोहन गौतम द्वारा अंग्रेजी में लिखित एवम इसका हिंदी अनुवाद श्री विजय कुमार सिंघल द्वारा।

(Hindi Translation of Gist of "Ageing Gracefully" part 14


      *पर्याप्त नींद लें (जारी...)*

*स्वस्थ नींद लेने के उपाय*

बहुधा डॉक्टर, वरिष्ठ जनों को पर्याप्त नींद लेने में सहायता के लिए अनेक सुझाव देते हैं, जिनमें से कई सभी उम्र के व्यक्तियों पर लागू होते हैं। ऐसे कुछ मौलिक सुझाव हैं- सोते समय कैफीन न लेना, रोज तय समय पर सोना और उठना एवम् सोने से पूर्व गरिष्ठ भोजन न करना। इनके अलावा निम्नलिखित आदतों को भी पर्याप्त नींद लेने के लिए अपनाया जा सकता है।

* स्वयं को सदैव स्वस्थ रखिए और यदि आपके स्वास्थ्य में कोई चिकित्सकीय कमी पायी जाये, तो उसका उपचार कराइए।
* प्रतिदिन प्रात:काल व्यायाम कीजिए। योग, ध्यान (Meditation) तथा भ्रामरी प्राणायाम गहरी नींद लेने में  सहायक हैं। कुछ श्वसन क्रियायें भी गहरी नींद लाने में उपयोगी हैं, जिसकी चर्चा अगली कड़ी में की जाएगी, ताकि आप उनका अभ्यास प्रारम्भ कर सकें।
* यदि आपको नींद नहीं आ रही है, तो बिस्तर में लेटे न रहें। उठकर कुछ आनन्दप्रद कार्य कीजिए जैसे पढ़ना या संगीत सुनना इत्यादि।
* यदि आपको रात्रि में सोने में कठिनाई होती है, तो दिन मैं झपकी/लंबे समय के लिए विश्रांति लेने से बचिए, विशेष रूप से दोपहर बाद।
* राष्ट्रीय निद्रा फ़ाउंडेशन (National Sleep Foundation:NSF) के एक सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि लगभग सभी प्रतिभागी किसी न किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे टीवी, कम्प्यूटर, वीडियो गेम, या सैल फोन का उपयोग सोने से ठीक पहले तक करते थे। यह बहुत गलत है। इन उपकरणों से निकलने वाला प्रकाश दिमाग़ में बहुत उथल-पुथल करता है, जिसको शान्त करना कठिन होता है। इसलिए सोने के लिए जाने से एक घंटे पहले ही इन उपकरणों को अलग रख दीजिए एवं उपयोग न करें, ताकि आप नियत समय पर तुरन्त सो सकें और गहरी नींद ले सकें।
* एक सरल नियम है- गहरी निद्रा हेतु सही खाओ (EAT RIGHT TO SLEEP TIGHT)। इसका कड़ाई से पालन कीजिए। आपको सोने के समय से कम से कम ४५ मिनट से एक घंटे पूर्व भोजन अवश्य कर लेना चाहिए। ऐसी निम्नलिखित वस्तुएँ अवश्य खाइए जिनसे आपको आराम और तृप्ति मिले एवं जो निद्रा लाने में सहायक हों।
* दूध सोने में बहुत सहायक होता है। इसमें ट्रिप्टोफन होता है, जो एक अम्ल है, जो सेरोटोनिन में बदल जाता है। सेरोटोनिन को दिमाग़ पर शांतिदायक प्रभाव डालने के लिए जाना जाता है।
* केले भी सन्तोषजनक नींद लाने में सहायक होते हैं, क्योंकि उनमें मैगनेशियम और पोटेशियम होता है। ये दोनों खनिज माँसपेशियों को प्राकृतिक आराम पहुंचाते हैं। केलों में अच्छे कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं जो आपको नींद लाते हैं। शकरकंद भी कार्बोहाइड्रेट की अच्छा स्रोत होने के कारण नींद लाने में सहायक हैं।
* अलसी के बीज भी ओमेगा-३ अम्लों, मैगनीशियम और ट्रिप्टोफन के अच्छे स्रोत हैं। मैगनीशियम माँसपेशियों को आराम देते हैं। ट्रिप्टोफन सेरोटोनिन निकालने में सहायता करते हैं, जो प्रसन्नता देने वाला हार्मोन है। ओमेगा-३ अम्ल चिंता और अवसाद कम करने के लिए जाने जाते हैं।
* केला और अलसी की तरह ही बादाम भी मैगनीशियम से भरपूर होते हैं, जिनसे आपको और अच्छी नींद आती है। इसके अलावा ये सोते समय आपके ब्लड शुगर को नियमित करने में सहायता करते हैं। अखरोट भी श्रेष्ठ हैं क्योंकि उनमें ट्रिप्टोफन होता है।
* विशेषज्ञ गहरी नींद के लिए सोते समय एक चम्मच शहद लेने की सलाह देते हैं। शहद में शामिल प्राकृतिक मिठास हमारे शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ाती है और ट्रिप्टोफन को मस्तिष्क में जाने देती है, जिससे शरीर को आराम देने वाले रसायन निकलते हैं। रात में आपके लीवर का ग्लायकोजन समाप्त हो सकता है, जिससे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन निकल सकते हैं।
* इसके अलावा दो मिनट तक सिर की मालिश करना या पैरों को गर्म पानी में रखना भी माँसपेशियों और नाड़ियों को आराम पहुँचाने में सहायक है।

हम अगली कड़ी में अपने शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) के नींद से सहसम्बंध (correlation) पर ध्यान केन्द्रित करेंगे और इस विषय पर इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार विजेता के शोधकार्य का सन्दर्भ देंगे। साथ ही हम भारतीय चिकित्सा विज्ञान "आयुर्वेद" के खाने, कार्य करने, सोने और जागने के नियत समय के बारे में हमारी संस्कृति में आदि काल से प्रयुक्त जैविक घड़ी के कथनों की भी चर्चा श्री जेम्स पैंग के लेख *आपको कब सोना चाहिए* के साथ करेंगे।

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