Tuesday, May 29, 2018

किस चीज की कमी के कारण कौन सा रोग होता है

किस चीज की कमी के कारण कौन सा रोग होता है 

किस चीज की कमी के कारण कौन सा रोग होता है 
१.रोगी के रोग की चिकित्सा करने वाले निकृष्ट , रोग के कारणों की चिकित्सा करने वाले औसत और रोग-मुक्त रखने वाले श्रेष्ठ चिकित्सक होते है                                                                                                                                                                                            अष्ट्रांग ह्रदयम्
२. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
३. हाई वी पी में -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
४. लो वी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
५. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी ।
६. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है गुड व शहद खाएं 
७. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी ।
८. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
९. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें ।
१०. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें ।
११. जम्भाई - शरीर में आक्सीजन की कमी ।
१२. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
१३. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
१४.  किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
१५. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।
१६. अस्थमा , मधुमेह , कैसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
१७. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
१८. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
१९. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है । 
२०. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है ।
२१. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
२२. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है । 
२३.  भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
२४.  HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
२५. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
२६.  चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है । 
२७.  शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
२८. वात के असर में नींद कम आती है ।
२९.  कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
३०. कफ के असर में पढाई कम होती है ।
३१. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है ।
३२. योग-प्राणायाम-  कफ प्रवृति वालों को नहीं करना चाहिए , वात प्रवृति वालों को थोडा,  पित्त प्रवृति वालों को ज्यादा करना चाहिए । 
३३.  आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
३४. शाम को वात-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
३५. पित्त प्रवृति वालों को प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए ।
३६. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
३७. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
३८. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
३९. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
४०. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
४१.  भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है 
४२. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 
43. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
४४. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
४५. छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है । 
४६. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
४७. मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए । 
४८. सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
४९. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है । 
५०. भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें । 
५१. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है । 
५२.  पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
५३.  छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है 
५४. रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं 
५५.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
५६. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
५७. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें । 
५८. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
५९. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
६०. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है । 
६१.  दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
६२.  गाय की घी सबसे अधिक पित्तवर्धक व कफ व वायुनाशक है । 
६३.  जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए । जैसे - प्रेशर कूकर
६४.  गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।
६५.  गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
६६.  मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , ३-४ दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
६७. रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
६८. भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है ।
६९. भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
७०. अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है । 
७१. अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें ।
७२. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए । 
७३. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए । 
७४. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है । 
७५.  बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
७६. स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
७७. भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
७८. सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए । 
७९. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि । 
८०.  शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें । 
८१. मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए । 
८२. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है । 
८३. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।
८४. एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
 ८५. खाने की बस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है । 
८६ .  रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग । 
८७ . छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए । 
८८. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल के चूसने लगता है । 
८९.  बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं । 
९०. चिंता , क्रोध , ईष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।                                                                                                                                                       ९१.  गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।
९२. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।
९३. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा ।
९४. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए ।
९५. जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है । 
९६. सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है । 
९७. स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है । 
९८ . तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है । 
९९. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।
१००. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,  इसे ना थूके ।


*Diebetes /  शुगर*
*एक नंगा सच.. जानिये.!*

*लूट मचाने के लिए दवा कंपनियाँ किस हद तक गिर सकती आप अनुमान भी नहीं लगा सकते..*

*अभी कुछ समय पूर्व स्पेन मे शुगर की दवा बेचने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियो की एक बैठक हुई है ,दवाओ की बिक्री बढ़ाने के लिए एक सुझाव दिया गया है कि अगर शरीर मे सामान्य शुगर का मानक 120 से कम कर 100 कर दिया जाये तो शुगर की दवाओं की बिक्री 40 % तक बढ़ जाएगी*

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ *बहुत समय पूर्व शरीर मे सामान्य शुगर का मानक 160 था दवाओ की बिक्री बढ़ाने के लिए ही इसे कम करते-करते 120 तक लाया गया है जिसे भविष्य मे 100 तक करने की संभावना है!*

ये *एलोपेथी दवा कंपनियाँ लूटने के लिए किस स्तर तक गिर सकती है ये इसका जीता जागता उदाहरण है आज मैडीकल साईंस के अनुसार शरीर मे सामान्य शुगर का मानक 80 से 120 है*

अब मान लो दवा कंपनियो के साथ मिलीभगत कर इन्होने कुछ फर्जी शोध की आड़ मे नया मानक 70 से 100 तय कर दिया, अब अच्छा भला व्यक्ति शुगर टेस्ट करवाये और शुगर का सतर 100 से 110 के बीच आए ,तो डाक्टर आपको शुगर का रोगी घोषित कर देगा,

*भय के कारण आप शुगर की एलोपेथी दवाएं लेना शुरू कर देंगे, अब शुगर तो पहले से सामान्य थी आपने जो भय के कारण शुगर कम करने की दवा ली तो उल्टा शरीर मे और कमजोरी महसूस होने लगेगी*
और 
*आप फिर इस अंधी खाई मे गिरते चले जाएंगे*

और मान लो आप जैसे 2 -3 करोड़ लोग भी इस साजिश का शिकार हुए तो ये एलोपेथी दवा कंपनियाँ लाखो करोड़ का व्यापार कर डालेंगी
*एक नंगा सच.. जानिये.! क्या आप जानते हैं.....* 

*1997 से पहले fasting diebetes की limit 140 थी।*
*फिर fasting sugar की limit 126 कर दी गयी।*
इससे *World Population में 14% diebetec लोग अचानक बढ़ गए।*
उसके बाद *2003 में WHO ने फिर से fasting sugar की limit कम करके 100 कर दी।*
याने *फिर से total Population के करीबन 70% लोग Diebetec माने जाने लगे।*

दरअसल diebetes ratio या limit तय करने वाली कुछ pharmaceutical कंपनियां थीं जो WHO को घूस खिलाकर अपने व्यापार को बढ़ाने के लिये ये सब करवा रही थीं।

और अपना बिज़नेस बढ़ाने के लिए ये किया जाता रहा।

लेकिन क्या *आपको पता है कि
हकीकत में डायबिटीज को कैसे जांचना चाहिए ?*

कैसे पता चलेगा कि आप डायबिटीज के शिकार हैं भी या नहीं ?

पुराने जमाने के इलाज़ के हिसाब से
*डायबिटीज चेक करने का एक सरल उपाय है :-*
*आप की उम्र और + 100*
*जी हाँ यही एक सचाई है*

अगर आपकी उम्र 65 है तो आपका सुगर लेवल खाने के बाद 165 होना चाहिये।
*अगर आपकी age 75 है तो आपका नॉर्मल सुगर लेवेल खाने के बाद 175 होना चाहिए।*
अगर ऐसा है तो इसका मतलब आपको डायबिटीज नहीं है।

ये होता है age के हिसाब से यानी.. 
So now you can count your diebetec limit as 100 + your age.

*अगर आपकी उम्र 80 है तो फिर आपकी डायबिटिक लिमिट खाने के बाद 180 काउंट की जानी चाहिये।*
मतलब अगर आपका सुगर लेवल इस उम्र में भी 180 है तो आप डायबिटिक नहीं हैं।
आपकी गिनती नॉर्मल इंसान जैसी होनी चाहिये।

लेकिन W.H.O. को अपने कॉन्फिडेंस में लेकर बहुत सारी फार्मा कम्पनियों ने अपने व्यापार के लिये सुगर लेवेल में उथल पुथल कर दी और आम जनता उस चक्रव्यूह में फंस गई।

No Doctor can guide u.
No one will advice u.
But its a bitter truth.!

उसके साथ साथ एक सच ये भी है कि--

अगर आपकी पाचन शक्ति उत्तम है तो आपको कोई टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है
या फिर आप अपने जीवन में कोई टेंशन नहीं लेते।
आप अच्छा खाना खाते हो
आप जंक फूड, ज्यादा मसालेदार या तैलीय भोजन या फ़्राईड फूड नहीं खाते
आप रेगुलर योगा या कसरत करते हैं
और आपका वजन आपकी हाइट के हिसाब के बराबर है
तो आपको डायबिटीज हो ही नहीं सकती।
यही सत्य है, बस टेंशन न लें अच्छा खाना खाएं, एक्सरसाइज करते रहें।



*जागो और दूसरों को जगाओ !*


Monday, May 21, 2018

Important Tips for Healthy Eyes


चलते-फिरते, उठते-बैठते, सोते-जागते अगर आपके शरीर में सूजन आती है तो ये बेहतरीन घरेलु उपाय करे

सूजन शरीर के जिस हिससे में होती है वो जगह पिलपिला सी हो जाती है और हाथ से दबाने पर एक गड्डा सा बनने लगता है। सूजन के मुख्य लक्षण में रोगी की त्वचा शुष्क हो जाती हैए कमजोरी, प्यास अधिक लगनाए बुखार आदि का होना है।

सूजन कोई अपने आप में बीमारी नहीं है। किसी दूसरी बीमारी की वजह से भी शरीर में सूजन हो सकती है। दिल की बीमारी में सूजन जांघों और हाथों पर होती है। लीवर की समस्या में सूजन पेट पर होती है। गुर्दे की बीमारी में सूजन चेहरे पर होती है। इसके अलावा महिलाओं के मासिक धर्म की समस्या में मुंहए हाथ और पैरों पर सूजन होती है। सूजन कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। यदि आप इन आयुवेर्दिक उपचारों को नियमित करते हो तो आप सूजन की समस्या से आसानी से बच सकते हो।

सूजन का घरेलू उपचार :

एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी का चूर्ण और पिसी हुई मिश्री को घोलकर रोज पीने से सूजन कुछ दिनों में खत्म हो जाती है।

एक लीटर पानी में एक कप जौं को उबाल लें और फिर इसे ठंडा करके पीते रहने से सूजन घटने लगती है। इस उपाय को भी नियमित रूप से करें।

350 ग्राम सरसों के तेल में 120 ग्राम लाल मिर्च के चूर्ण को मिलाकर इसे अांच पर गर्म करें। और उबलने के बाद इसे छान लें और सूजन वाली जगह पर इसका लेप लगाएं। एैसा करने से सूजन ठीक हो जाती है।

पुराने गुड के साथ दस ग्राम सौंठ को मिलाकर खाते रहने से कुछ ही दिनों में सूजन की समस्या ठीक हो जाती है।

नमक को गर्म पानी में डालकर सूजन वाली जगह पर कपड़े से सिकाई करने से सूजन ठीक हो जाती है।

अनानास का सेवन करने के बाद दूध पीते रहने से सूजन खत्म होने के साथ उतर भी जाती है। लेकिन यह उपाय आपको लंबे समय तक करना होगा। 

अंजीर के रस के साथ जौ को बारीक पिसें आटे को मिलाकर पीते रहने से सूजन आसानी से दूर हो जाती है।

खजूर और केला भी सूजन को खत्म करते हैं। इसलिए खजूर और केला नियमित खाते रहने से थोड़े ही दिनों में सूजन उतर जाती है।

गोबर के उपले को जलकार बने चूर्ण का लेप तेल के साथ मिलाकर सूजन वाली जगह पर लगाने से सूजन ठीक हो जाती है।

पानी में गेहूं के दानों को उबाल लें और इस पानी से सूजन वाली जगह को धोने से कुछ ही दिनों में सूजन उतर जाती है

पानी के साथ 1/4 चम्मच पिसी हुई हल्दी की फांक लेने से सूजन की समस्या कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी।

जीरा और चीनी को बराबर मात्रा में पीसकर दिन में तीन बार एक चम्मच फंकी को लेते रहने से थोड़े ही दिनों में सूजन खत्म हो जाएगी।

तरबूज के बीजों को छाया में सुखा लें और इन्हें पीस लें। और एक कप पानी में तीन चम्मच तरबूज के घिसे बीजों को मिलाकर एक घंटे के लिए भिगो लें और फिर इसे छानकर पीते रहने से सूजन कम होकर उतर जाती है। इसका सेवन दिन मे चार बार करें। आपको जल्दी फायदा मिलेगा।

400 ग्राम पानी में 200 ग्राम कच्चे आलू को काटकर आंच में उबालें और इससे सूजन पर सेंक करें। आलू के टुकड़ों का लेप करने से सूजन जल्दी उतर जाती है।

एक गिलास पानी में दो चम्मच गाजर के बीजों को आंच में उबालें। और फिर इसे ठंडा करके पीएं। इस उपाय को रोज करने से सूजन बहुत ही तेजी से खत्म हो जाती है।

मक्खन में काली मिर्च के चूर्ण को डालकर अच्छे से मिलाकर खाते रहने से थोड़े ही दिनों में बच्चों की सूजन खत्म हो जाती है।

निरोगी हेतु महामन्त्र का पालन जरूर करें



मन्त्र 1 :- 

भोजन पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें

• ‎रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन करें

• ‎विकारों को पनपने दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)

• ‎वेगो को रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)

• ‎एल्मुनियम बर्तन का उपयोग करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)

• ‎मोटे अनाज छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें

• ‎भगवान में श्रद्धा विश्वास रखें



मन्त्र 2 :-

पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड खाएं)

• ‎भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये) 

• ‎सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये

• ‎ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन करें

• ‎पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये

• ‎बार बार भोजन करें आर्थत एक भोजन पूणतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें



आँख की फुंसी गुहेरी का उपचार – Gharelu Nuskhe For Eye Sty

आँख की फुंसी जिसे अंग्रेजी में Eye Sty  कहते है , आँख की पलकों पर बाहर की तरफ या अंदर की तरफ हो जाती है ज्यादातर यह फुंसी बाहर की तरफ होती है। आम बोलचाल में इसे गुहेरी Guheri कहते है। इसे आँख में बिलनी  aankh me Bilni  के नाम से भी जाना जाता है।

इस फुंसी में दर्द होता है , सूजन होती है। पलक झपकाना मुश्किल हो जाता है। कई बार इससे आँख में खुजली या जलन भी होती है। तेज रोशनी से दिक्कत होने लगती है। फुंसी के बीच पीले रंग में पस भी नजर सकता है। फुंसी से कुछ पानी भी निकल सकता है।

गुहेरी आँख में फुंसी होने का कारण – Eye sty reasons

आँख की पलक में छोटी छोटी तेल ग्रंथियां होती है। यह ग्रंथियां डेड स्किन , धूल मिट्टी , या काजल आदि के कारण बंद हो जाती है। इसके कारण वहाँ बेक्टिरिया पैदा हो जाते है। इस वजह से  सूजन होने लगती है। यह एक फुंसी का रूप ले लेती है। यही आंख की गुहेरी होती है। साधारणतया सात आठ दिनों में ये ठीक हो जाती है। ये बढ़े नहीं इसका ध्यान रखना चाहिए।


हार्मोन के बदलाव , तनाव और साफ सफाई का ध्यान नहीं रखने के कारण भी आँख में फुंसी हो सकती है। एक बार में एक या एक से अधिक फुंसी भी ही सकती है

आँख की फुंसी गुहेरी का घरेलु इलाज – Gharelu Nuskhe for Eye Sty

aankh me phunsi theek kaise kare , aankh ki bilani ,aankh me bilauni

  गर्म पानी में साफ सूती कपड़े को भिगोकर नीचो लें। इससे गुहेरी की सिकाई करें। दिन में तीन चार बार इस प्रकार सिकाई करने से बहुत आराम मिलता है। सुजन और दर्द कम हो जाते है।

  इमली  के बीज को दो दिन तक पानी में भिगोकर छिलका निकाल दें। इस छिलका निकले हुए इमली के बीज की गिरी को चंदन की तरह घिस कर गुहेरी ( eye sty ) पर लगाएं। इससे आश्चर्य जनक फायदा होता है इससे आँख की फुंसी ( aankh ki funsi) ठीक हो जाती है।

  सीधे हाथ की तर्जनी अंगुली बाईं हथेली पर तेजी से घिसें गर्म होने पर अंगुली फुंसी पर रखें।

यह क्रिया बार बार ( 15 -20 बार ) करने से आँख में फुंसी ठीक हो जाती है। दिन में चार पांच बार इसे करें।

अंगुली की मदद से योग मुद्रा बनाई जाती है जो बहुत फायदेमंद होती है। ये बहुत आसान और लाभदायक हैं। इन्हे कैसे बनाते हैं और इसके क्या फायदे होते हैं ,जानने के लिए यहाँ क्लीक करें।

  गर्म पानी में थोड़ी हल्दी मिलाकर इस पानी से कपड़े की मदद से सिकाई करने से आँख फुंसी ठीक होती है।

  ग्वारपाठे  Aloe Vera  का गूदा फुंसी पर दिन में तीन चार बार लगाने से गुहेरी का दर्द सूजन मिटकर गुहेरी ठीक हो जाती है।

  एक कप पानी में अमरुद के चार पाँच पत्ते डालकर उबाल लें। गुनगुना रहने पर इस पानी में साफ कपड़ा भिगोकर इससे सिकाई करें।

दिन में दो तीन बार इस प्रकार सिकाई करने से आँख की फुंसी ठीक होती है।

  बार बार आँख पर फुंसी हो जाती हो तो त्रिफला चूर्ण आधा चम्मच सुबह शाम एक सप्ताह तक दूध के साथ लें। आँख पर फुंसी होना बंद हो जायेगी त्रिफला चूर्ण की सम्पूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लीक करें।

  गुप्तांग की सफाई नहीं करने पर भी आँख पर बार बार फुंसी हो जाती है। अतः गुप्तांग को नहाते वक्त अच्छे से धोकर साफ करना चाहिए। लिंग के अगले हिस्से शिश्न मुंड Penis head की स्किन के नीचे की सफाई विशेष कर जरुरी होती है। शिश्न मुंड की सफाई नहीं करने से स्वप्नदोष भी हो सकता है तथा शीघ्रपतन की समस्या भी हो सकती है।

  आँख की फुंसी ( eye sty ) को मसलना नहीं चाहिये। फुंसी को फोड़ने या पस निकालने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिये। मसलने या फोड़ने से इन्फेक्शन होकर समस्या बढ़ सकती है।

  फुंसी ( eye sty ) को आँख के मेकअप जैसे मस्कारा , आई लाइनर , आई शेडो आदि से छुपाने की कोशिश नही करनी चाहिये मेकअप के सामान से इन्फेक्शन बढ़ सकता है। पुराना हो चुका आँख के मेकअप का सामान भूल कर भी काम में ना लें।



  आँख में फुंसी होने पर कांटेक्ट लेंस नहीं पहनने चाहिए। लेंस की बजाय चश्मा काम में लेंना चाहिये आराम रहेगा।

  तीन महीने से ज्यादा पुराना आँखों के मेकअप का सामान यूज़ नहीं करना चाहिये। ये इन्फेक्शन की वजह बन सकता है।


  मानसिक तनाव गुहेरी का कारण हो सकता है। एग्जाम के समय छात्रों  को अकसर ये परेशानी हो जाती है। टेंशन करने के बजाय अपने दिमाग की ताकत बढ़ाने की कोशिस करनी चाहिए।  दिमागी ताकत बढ़ाने के घरेलु नुस्खे के लिए  यहाँ क्लीक करें। रिलैक्स होना सीखें। खुशहाल रहना सीखें।


आँखों की 7 बेहतरीन एक्सर साइज – 7 Best Eyes exercise


आँखों की एक्सरसाइज ankho ki exercise करने पर लोग ध्यान नहीं देते जबकि यह बहुत आवश्यक है। आँखों की परेशानी का सबसे बड़ा कारण आँखों की बाहरी पेशियों पर तनाव पड़ना होता है।

इस तनाव को कम करने के लिए आँखों की एक्सरसाइज या कसरत ankho ki exercise की जाती है


 नियमित रूप से आंखों की एक्सरसाइज eyes exercise करने से आँखों की मांसपेशियां और आँखों के स्नायु तंत्र मजबूत होते है और आँखें लम्बे समय तक सही तरीके से काम करती हैं।

आँखें सुन्दर स्वस्थ बनी रहती  है। ये बहुत ही आसान है सीखिए आँखों की एक्सरसाइज कैसे करें।

आँखों की एक्सरसाइज करने का तरीका – Eyes Exercise

  सीधे खड़े हों जाएँ।

पहली आँखों की एक्सरसाइज 

गर्दन को स्थिर रखते हुए आँखों की पुतली को धीरे धीरे दाएं ले जायें जितना ज्यादा आसानी से ले जा सकते हो , जोर ना डालें।

फिर धीरे धीरे बाएं ले जाये , इसके बाद वापस दाईं तरह।

इस प्रकार से चार बार पुतली को दाएं और बाएं घुमाएँ

अब आँखें बंद करके दो मिनट आँखों को विश्राम दें

Exercises-for-Eyes
दूसरी आँखों की एक्सरसाइज 
गर्दन को स्थिर रखते हुए पुतलियों को धीरे धीरे ऊपर ले जाएँ छत की तरफ देखें।
फिर धीरे धीरे नीचे ले जाएँ फर्श की तरफ देखें फिर ऊपर ले जाएँ इस तरह चार बार ऊपर नीचे चलाएं

इसके बाद आँखें बंद करके दो मिनट आँखों को विश्राम दें

Eyes Exercises
तीसरी आँखों की एक्सरसाइज 
गर्दन को स्थिर रखते हुए पुतलियों को ऊपर ले जाएँ फिर दायीं तरफ गोलाकार क्लॉक वाइज घुमाते हुए एक सर्कल बनायें

फिर पुतलियों को बाईं और एंटी क्लॉक वाइज घुमाते हुए एक सर्कल बनायें।
इस तरह दोनों तरफ चार बार घुमाएँ।
अब आँखें बंद करके दो मिनट आँखों को आराम दें।

चौथी आँखों की एक्सरसाइज 

हथेलियों से आँखों को दो मिनट इस प्रकार ढक दें की जरा भी रौशनी आँखों तक नहीं पहुंचे।
आँखों पर दबाव बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए।
आँखों और दिमाग को ढ़ीला छोड़ दें।
पूरा विश्राम करें। इसे पामिंग कहते है।
दिन में तीन चार बार पामिंग करें।

पाँचवी आँखों की एक्सरसाइज 
अंगूठे को अपने सामने लगभग 10 इंच की दूरी पर सीधा रखें।
अंगूठे के ऊपरी हिस्से पर देखें।
अब अंगूठे के पीछे पंद्रह बीस फुट दूर स्थित किसी भी चीज को देखें।
वापस अंगूठे को देखें।
इस तरह आठ दस बार नजर पास और दूर केंद्रित करें।
इसके बाद एक बार पामिंग करके वापस अंगूठे को और आगे देखना दोहराएँ


छठी आँखों की एक्सरसाइज 
काम करते समय बीच में रुक कर दस बार पलकों को जल्दी जल्दी झपकाएं।
इससे थकान मिटेगी।
आँखे गीली और चमकदार बनी रहेगी।

सातवीं आँखों की एक्सरसाइज 
हँसे और मुस्कराएँ। इससे आँखों में एक विशेष मुग्ध कर देने वाली चमक पैदा होती है।


आँखों के नीचे काले घेरे मिटाने के घरेलु उपाय – Under eye dark circle


आँखों के काले घेरे  Dark Eye Cicle का मतलब है आँखों के आस पास की स्किन का रंग अपेक्षाकृत अधिक गहरा होना यह अंडर आई सर्कल Under eye circle डार्क रिंग Dark rings या डार्क शेडो Dark shadow भी कहलाते हैं।

आँखों के आसपास की त्वचा बहुत कोमल और सेंसिटिव होती है। इसी वजह से यहाँ शारीरिक और मानसिक अवस्था का असर तुरंत दिखाई देने लगता है। तेज धूप और अन्य प्राकृतिक चीजों के कारण भी आँखों के पास की स्किन गहरी हो सकती है। ये पुरुष और महिला दोनों को हो सकते है तथा किसी भी उम्र में हो सकते हैं।

आँखों के काले घेरे घरेलु उपाय
आँखों के नीचे काले घेरे होने पर चेहरा निस्तेज , बुझा-बुझा और बीमार नजर आता है तथा इनके कारण उम्र अधिक नजर आती है। अतः ध्यान रखना चाहिए। थोड़ा भी ऐसा लगे तो उपचार कर लेना चाहिए अन्यथा अधिक बढ़ने के बाद इनका मिटना मुश्किल हो सकता है।

डार्क आई सर्कल मिटाने के घरेलु उपाय अपनाकर इनसे मुक्ति पाई जा सकती है। यहाँ आँखों के पास काली या गहरी हुई स्किन को ठीक करने के तरीके बताये गए हैं। इनका उपयोग करके काले घेरे की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
आँखों के नीचे काले घेरे होने के कारण – Dark Eye Circle reasons
डार्क आई सर्कल के कई कारण हो हैं जिनमें सामान्यतया ये कारण अधिक होते हैं

  अनुवांशिकता  मानसिक तनाव  नींद पूरी नहीं हो पाना    हार्मोन का बदलाव  दिनचर्या बिगड़ना  तेज धूप  उम्र का प्रभाव  ड्राई स्किन  पौष्टिक भोजन नहीं लेना  शरीर में आयरन या विटामिन आदि की कमी होन  लम्बे समय से बीमार होना

आँखों के पास काले घेरे मिटाने के घरेलु नुस्खे

Dark Eye Circle Gharelu Upay

बादाम का तेल  Almond oil

बादाम का तेल आँखों के नीचे की मुलायम त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। नियमित रूप से बादाम का तेल लगाने से रंग हल्का होता है। इसके साथ विटामिन E का उपयोग करने से अधिक लाभ हो सकता है।
इसके लिए सोते समय हल्के हाथ से बादाम के तेल की डार्क सर्कल पर मसाज करें। सुबह ठन्डे पानी से धो लें। यह प्रयोग सर्कल के घेरे हल्के होने तक प्रयोग करें।

ककड़ी – cucumber
ककड़ी में त्वचा का रंग हल्का करने का गुण होता है। इसमें कोमल एस्ट्रिंजेंट होता है। इससे त्वचा रिफ्रेश हो जाती है। इसके लिए

  ककड़ी की एक स्लाइस आधा घंटा फ्रिज में रखकर ठंडी कर लें। इसे दस मिनट के लिए अपनी आँखों पर रख लें। इसके बाद सादा पानी से धो लें। दिन में दो बार यह करें।  इसे नियमित 12 -15  दिन तक करें।

  दूसरा तरीका यह है कि बराबर मात्रा में ककड़ी का रस और नींबू का रस मिला लें। इसे अपनी गहरी त्वचा पर कॉटन की मदद से लगा लें। 10-15 मिनट लगा रहने दें फिर सादा पानी से धो लें। एक सप्ताह तक नियमित इसे करने से अंडर आई डार्क सर्कल हल्के हो जाते हैं।

कच्चा आलू – Raw potato

कच्चे आलू में प्राकृतिक रूप से ऐसे तत्व होते हैं जो त्वचा का रंग साफ करते हैं। आँखों के काले घेरे भी इससे हल्के हो सकते हैं।

इसके लिए कच्चे आलू को कददू कस करके रस निकाल लें। रस कॉटन की मदद से आँखे बंद करके आँख के चारों तरफ लगा लें। 10- 15 मिनट लगा रहने दें फिर पानी से धो दें। दो सप्ताह तक दिन में दो बार इसे लगाने से काले घेरे सामान्य हो जाते हैं।

आलू के रस की जगह कच्चे आलू की स्लाइस आँख पर रखने से भी डार्क आई सर्कल हल्के पड़ जाते हैं।



गुलाब जल – Rose water

गुलाब जल में त्वचा को स्वस्थ और सुन्दर बनाने के  गुण होते हैं। यह थकी हुई अंधियारी सी आँखों को ताजा कर देता है। यह एक स्किन टोनर की तरह काम करता है।

गुलाब जल में रुई भिगोकर आँखों पर रख लें। इसे 15 मिनट लगा रहने दें। फिर पानी से धो लें। कुछ सप्ताह तक नियमित दिन में दो बार इस तरह गुलाब जल लगाने से थकान के कारण होने वाले आँखों के काले घेरे मिट जाते हैं।

टमाटर -Tomato

टमाटर हमेशा घर में उपलब्ध रहता है। यह सब्जी भी है और फल भी। टमाटर खाने के तो अनगिनत फायदे हैं ही। इस त्वचा के लिए भी काम में लिया जा सकता है। टमाटर में नेचुरल ब्लीचिंग की खूबियाँ होती हैं।

एक चम्मच टमाटर का रस और आधा चम्मच नीबू का रस मिला लें। इसे काले घेरों पर हल्के से लगा लें। दस मिनट लगा रहने दें फिर पानी से धो लें। दिन में दो बार कुछ सप्ताह तक इसे लगायें और फर्क देखें।


नींबू का रस – Lemon juice

नींबू के रस में मौजूद विटामिन C के कारण यह आँखों के काले घेरे हल्के करने में सहायक होता है। क्योंकि नींबू का रस स्किन साफ करता है।

इसके लिए नींबू का ताजा रस निकालें। इस रस को कॉटन की मदद से काले घेरों पर लगायें। 10 मिनट लगा रहने दें। फिर धो लें। कुछ सप्ताह दिन में एक बार नियमित रूप से करें।

दूसरा तरीका यह है किएक चम्मच नींबू का रस , दो चम्मच टमाटर का रस , चौथाई चम्मच बेसन , और चुटकी भर हल्दी पाउडर मिला लें। यह गाढ़ा पेस्ट कोमलता से आँखों के चारों तरफ लगा लें। ऑंखें बंद रखें। 10 -15 मिनट बाद पानी से धो लें। इसे सप्ताह में दो या तीन बार करें।

नींबू के रस से जलन ज्यादा हो तो इसे ना लगायें।

हरी चाय पत्ती – Green Tea leaf

आजकल ग्रीन टी का चलन बहुत हो गया है। इसके बहुत से फायदे हैं। ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है। इसका उपयोग आँख के काले घेरे कम करने के लिए इस प्रकार करें

ग्रीन टी को गर्म पानी में डालें। पांच मिनट बाद छान कर कुछ देर फ्रिज में रखकर ठंडा कर लें। इसमें कॉटन भिगोकर आँख 10 -15 मिनट पर रखें। नियमित रूप से ऐसा करने से  आँख के पास काली पड़ी स्किन ठीक हो जाती है।

ठंडा दूध  – Cold milk

दूध त्वचा को साफ और मुलायम बनाने के लिए कई प्रकार से काम लिया जाता रहा है। उबटन आदि में भी दूध मलाईका प्रयोग किया जाता है। आँखों को तरोताजा करने के लिए ठंडा दूध का उपयोग ऐसे करें

ठन्डे दूध में कॉटन भिगोकर आँख पर रखें। 10 -15 मिनट रखने के बाद सादा पानी से धो लें। दिन में दो बार कुछ सप्ताह तक ऐसा करने से आँख के पास की काली त्वचा गोरी हो जाती है।

संतरे का रस – Orange juice

संतरे के रस में ग्लिसरीन मिलाकर आखों के आस पास लगा लें। 10 -15 मिनट बाद धो लें। इससे डार्क सर्कल भी ठीक होते हैं और आँखों में एक नई चमक जाती है।


पोदीने की पत्तियाँ – Mint Leaves

पोदीने की पत्तियां पानी के साथ पीस कर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट आखों के पास वाली त्वचा पर लगा लें। 10 -15 मिनट बाद धो लें। इसे रात को सोने से पहले नियमित कुछ दिन करें। इससे काले घेरे मिटते हैं।


दही हल्दी – Curd haldi

एक चम्मच दही में चुटकी भर हल्दी मिलाकर आँखों के पास लगाकर रखें। 10 मिनट बाद पानी से धो लें। धूप के कारण आँखों के नीचे काले घेरे  Under Eye dark circle बने हो तो यह उपचार अच्छा काम करता है।

आँखों के पास स्किन का रंग गहरा होने से बचाने के उपाय

Dark Eye Circle Prevention

  आँखों को तेज धूप से बचायें।  धूप में बाहर निकलें तो सनस्क्रीन , गॉगल , कैप आदि का उपयोग करें।

  देर रात तक नहीं जागें समय पर सोयें और समय से उठें।

  आयरन या खून की कमी ना हो इसका ध्यान रखें। पालक , चुकंदर , गाजर , एपल , केला आदि नियमित रूप से खायें।

  मानसिक तनाव , गुस्सा आदि से बचने के लिए योग , प्राणायाम आदि सीख कर इनका अभ्यास करें।

अपनी दिनचर्या सही रखें।

  कंसीलर या फाउंडेशन जैसे मेकअप की मदद से भी काले घेरे छुपाये जा सकते हैं।

मोतियाबिंद की परेशानी और इससे छुटकारा – Cataract and visibility
मोतियाबिंद Cataract की समस्या सामान्यतया 55  वर्ष या अधिक उम्र में होती है। यदि इस उम्र में आँखों से अजीब सा धुंधलापन दिखाई दे 
यह मोतियाबिंद हो सकता है। इसे आँखों में जाला आना या सफ़ेद मोतिया भी कहते हैं। विश्वभर में आँखों की रोशनी जाने का यह मुख्य कारण है। शुरू में ऐसा लग सकता है कि शायद चश्मे का नंबर बढ़ गया है इसलिए दिक्कत हो रही है।
मोतियाबिंद
चश्मे की वजह से धुंधला दिखना और मोतियाबिंद की वजह से धुंधला दिखाई देने में फर्क होता है। जो इस प्रकार है
  मोतियाबिंद में आंख के लेंस से रोशनी पार नही हो पाती लेंस पर एक परत सी चढ़ जाती है जबकि चश्मे में आँख के लेंस से रोशनी पार जाती है लेकिन उसका फोकस सही जगह नहीं पड़ता।

  बाहर से देखने पर आँख के लेंस पर सफेदी सी दिखाई पड़ती है। नंबर बढ़ने पर यह सफेदी नहीं दिखती , लेंस साफ दीखता है।
  नंबर बढ़ने पर सिरदर्द हो सकता है। मोतियाबिंद के कारण सिरदर्द सामान्यतया नहीं होता है।

मोतियाबिंद के लक्षण – Cataract Symptom

मोतियाबिंद होने पर धुंधला दिखाई देना , वस्तुएँ पीली और अस्पष्ट या विकृत सी दिखाई देने लगती हैं। धूप , तेज रोशनी सहन नहीं होती।
रात के समय या कम रोशनी में दिखने में परेशानी होती है तथा रंग बदरंग से नजर आने लगते हैं। चमकदार रोशनी के चारों ओर छल्ले जैसे दिखने लगते हैं। मोतियाबिंद के कारण पर सिरदर्द , आँख से आंसू या आँख में जलन आदि तकलीफें नहीं होती हैं
मोतियाबिंद का इलाज ऑपरेशन है जिसमे आँख में से पुराना प्राकृतिक लेंस निकाल कर नया कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है।

मोतियाबिंद के कारण 
मोतियाबिंद ज्यादातर अधिक उम्र के कारण होता है। एक उम्र के बाद लगभग 40 % लोगों को यह हो जाता है। उम्र के अलावा अन्य कारण
ये हो सकते हैं – —  आँख में चोट  जन्मजात आँख में मोतियाबिं  दूसरी परेशानी के लिए आँख का ऑपरेशन  डायबिटीज    धूम्रपान  हवा में अधिक प्रदुषण  धूप में अधिक समय बिताना
  अधिक शराब का सेवन  कुछ विशेष प्रकार के रेडिएशन

मोतियाबिंद बहुत धीरे धीरे बढ़ता है। शुरू में पता ही नहीं चलता , जब यह रोशनी को बाधित करना शुरू कर देता है तब पता चलता है।
मोतियाबिंद का ऑपरेशन – Cataract Surgery

 मोतियाबिंद का ऑपरेशन cataract Surgery कब कराना चाहिए यह आँख के कारण होने वाली समस्या पर निर्भर करता है। यदि
डाक्टर तुरंत ऑपरेशन कराने के सलाह नहीं दे तो जब भी आपको लगे आँख के कारण दिखने में परेशानी ज्यादा होने लगी है तब यह ऑपरेशन करवाया जा सकता है।

यह ऑपरेशन बहुत सफल ऑपरेशन है। इसमें सर्जन डॉक्टर पुराना लेंस निकालकर नया कृत्रिम लेंस लगा देते हैं। इसमें उच्च तकनीक से ऑपरेशन किया जाता है जिसमे टांके भी नहीं लगाए जाते है। सामान्य तौर पर एक दिन में हॉस्पिटल से छुट्टी मिल जाती है। रिकवरी बहुत जल्द और आसानी से होती है। ऑपरेशन के बाद में चेकअप के लिए बुलवाया जा सकता है। 95 % लोग यह ऑपरेशन कराने के बाद बहुत संतुष्ट नजर आते है। साफ दिखाई देने की खुशी चेहरे पर झलकती है।

आँख की जाँच कब करानी चाहिए – Eye Checkup
आँख में मोतिया बिंद या कालापानी ( ग्लूकोमा ) का जल्दी से पता नहीं लग पाता है। एक उम्र के बाद इनके होने की संभावना बढ़ जाती है।
इसलिए आँखों के डॉक्टर से आँख की जाँच नियमित रूप से करवाते रहना चाहिए। यदि परिवार की किसी सदस्य को यह परेशानी है तो जाँच और भी जरुरी हो जाती है।

वैसे तो एक वयस्क व्यक्ति को दो वर्ष के अंतराल से आँखों की जाँच करवा लेनी चाहिए लेकिन 50  वर्ष की उम्र के बाद साल में एक बार आँखो की जाँच करवा लेनी चाहिए और यदि डायबिटीज जैसी बीमारी हो तो जाँच अधिक बार करवा लेना ठीक होता है।

आँखों के लिए घरेलु नुस्खे उपाय 
आँखों के लिए घरेलु नुस्खे और उपाय अपनाकर आँखों को स्वस्थ और सुन्दर रखा जा सकता है। आँखों का ध्यान रखने पर आँखें जीवन भर आपका साथ दे सकती हैं। आँख दिमाग के बाद शरीर की सबसे जटिल संरचना है।
आँखों से देखने समझने की प्रक्रिया इतनी जटिल है की दिमाग का लगभग आधा हिस्सा इसमें जुटा रहता है। आँख का लगभग सिर्फ 15 % हिस्सा हमें दिखाई देता है बाकि हिस्सा अंदर की तरफ होता है। प्रकृति ने आँखों की सुरक्षा के लिए पूरी व्यवस्था की है।
पलकें आँख की सुरक्षा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। पलक झपकने में एक सेकंड का भी दसवाँ हिस्सा लगता है। ये शरीर की सबसे फुर्तीली मांसपेशी है। बरौनियां ( Eye Leshes ) भी आँख की सुरक्षा से जुड़ी है।
दुनिया का कोई भी कैमरा कुदरत के इस शानदार कैमरे का मुकाबला नहीं कर सकता जो प्रकृति का हर सुन्दर रंग , आकार , बनावट , दूरियां , नजदीकियाँ , गहराइयाँ , भावनाएं आदि हर चीज़ को हर कोण ( Angle ) से हमें दिखाने में सक्षम हैं।
इस खूबसूरत दुनिया को देखने के अलावा आँखों का हमारे चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने में भी बड़ा योगदान होता है। जब प्रकृति ने हमे इतना अनमोल उपहार दिया है तो हमें इसे सहेजना चाहिए और उसका दुरूपयोग नहीं करना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी और देखभाल करके हम इसका उम्र भर आनंद उठा सकते है।
आजकल कम्प्यूटर और मोबाइल का उपयोग बहुत बढ़ गया है। इसकी वजह से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम नामक बीमारी भी बहुत बढ़ गई है।
आँखों की 80 % समस्या से बचा जा सकता है या ये ठीक  हो सकती है। इसके लिए हमें आँखों को स्वस्थ रखने के तरीकों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए आँखों के लिए क्या खाएँ , क्या ना खायें। किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए
स्वस्थ और सुन्दर आँखों के लिए क्या करें। क्या आँखों की एक्सरसाइज होती है। जानिए ये सब और आँखों के लिए घरेलु नुस्खे जिनसे आँखें तेज होती है।
आँखे स्वस्थ रखने के घरेलु उपाय
  सुबह मुँह में पानी भरकर आँखों पर (आँखें बंद करके ) ठण्डा  पानी छिड़कें। इसे दिन में या शाम को जब भी आँखें थकी हुई महसूस हो तब कर सकते है। इससे आँखों में ताजगी जाती है।
  100 ग्राम बादाम भिगोकर छिलका निकाल दें और क़तर लें ( Flacks ) , 50 ग्राम कतरी हुई अखरोट गिरी  , 50 ग्राम किसा हुआ नारियल , 250 ग्राम मिश्री , 250 ग्राम सौंफ इन सबको मिलाकर रख लें।
रोजाना खाना खाने के बाद चार चम्मच इसमें से लेकर अच्छे से चबा चबा कर खा लें। दो महीने लगातार खाने से आँखें तेज , निरोग , सुन्दर हो जाती है। शानदार प्रयोग है।badam—  नियमित रूप से आँखों की एक्सरसाइज करनी चाहिए। आँखों की एक्सरसाइज सीखने के लिए क्लीक करें और पढ़ेंआँखों की 7 बेहतरीन एक्सर साइज . इसमें बहुत कम समय लगता है और कभी भी कर सकते है।
  धूल , धुआँ और तेज रौशनी से आँखों को बचाएँ।
  सिर धोने के लिए या चेहरा धोने के लिए अधिक गर्म पानी का उपयोग ना करें।
  गाजर , लाल टमाटर , आम , पपीता , केला ,  संतरा ,  दूध  , खजूर , पत्ता गोभी  , हरी पत्तेदार सब्जियाँ आदि विटामिन ” A ” वाली चीजें भोजन में शामिल करनी चाहिए। विटामिन ” A ” आँखों के लिए बहुत जरुरी होता है।
  सुबह खाली पेट आधा चम्मच ताजा मक्खन , आधा चम्मच पिसी हुई मिश्री और चौथाई चम्मच पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर खा लें। इसके बाद कच्चे नारियल का एक टुकड़ा खा लें। फिर बारीक सौंफ आधा चम्मच खा लें। ये प्रयोग दो महीने लगातार करने से ऑंखें सुन्दर, स्वस्थ और तेज हो जाती है।
  सुबह देर तक सोना और रात को देर तक जागना दोनों ही आँखों पर तनाव पैदा करते है। इससे आँखों का नूर चला जाता है और आँखें रूखी और बेजान नजर आने लगती है।
  तेज मिर्च मसाले वाले , तले हुए , खट्टे , बासी भोजन से आँखें कमजोर होती है। इन्हे कम ही लेना चाहिए।
  सुबह सूर्योदय से पहले नंगे पैर घास पर कुछ देर चलने से आँखों को ताजगी मिलती है। क्योंकि सुबह घास पर रात भर गिरी ओस की नमी होती है जो शरीर की गर्मी शांत करती है और नेत्र ज्योति बढाती है।
  स्कूटर , बाइक या दूसरे वाहन के उपयोग के समय जिन पर तेज हवा लगती है आँखों के बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तेज हवा आँखों के लिए नुकसान देह होती है।
  ऋतुचर्या  यानि मौसम के हिसाब से खान पान दिनचर्या में बदलाव का ध्यान रखें। अन्यथा आँखों पर असर पड़ता है।
  लेटकर बुक्स पढ़ने से या मोबाइल लैपटॉप आदि पर काम करने से आँखों पर दबाव बढ़ जाता है। अतः ऐसा ना करें।
  आँखों से कम दिखाई दे या लगातार सिरदर्द हो तो और चश्मे की जरुरत हो तो जरूर लगाएं।
  पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ।

आँखों में सुबह की बासी लार काजल की तरह लगाने से आँखों के सभी रोग नष्ट होते है।

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