Friday, January 18, 2019

Name Of I indian Rulers

जानकारी काबीले तारीफ है... गौर किजीये !

*I N D I A N   R  U  L E  R  S*

*गुलाम वंश*
1=1193 मुहम्मद  घोरी
2=1206 कुतुबुद्दीन ऐबक
3=1210 आराम शाह
4=1211 इल्तुतमिश
5=1236 रुकनुद्दीन फिरोज शाह
6=1236 रज़िया सुल्तान
7=1240 मुईज़ुद्दीन बहराम शाह
8=1242 अल्लाउदीन मसूद शाह
9=1246 नासिरुद्दीन महमूद 
10=1266 गियासुदीन बल्बन
11=1286 कै खुशरो
12=1287 मुइज़ुदिन कैकुबाद
13=1290 शमुद्दीन कैमुर्स
1290 गुलाम वंश समाप्त्
(शासन काल-97 वर्ष लगभग )

*👉खिलजी वंश*
1=1290 जलालुदद्दीन फ़िरोज़ खिलजी
2=1296
अल्लाउदीन खिलजी
4=1316 सहाबुद्दीन उमर शाह
5=1316 कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
6=1320 नासिरुदीन खुसरो  शाह
7=1320 खिलजी वंश स्माप्त
(शासन काल-30 वर्ष लगभग )

*👉तुगलक  वंश*
1=1320 गयासुद्दीन तुगलक  प्रथम
2=1325 मुहम्मद बिन तुगलक दूसरा 
3=1351 फ़िरोज़ शाह तुगलक
4=1388 गयासुद्दीन तुगलक  दूसरा
5=1389 अबु बकर शाह
6=1389 मुहम्मद  तुगलक  तीसरा
7=1394 सिकंदर शाह पहला
8=1394 नासिरुदीन शाह दुसरा
9=1395 नसरत शाह
10=1399 नासिरुदीन महमद शाह दूसरा दुबारा सता पर
11=1413 दोलतशाह
1414 तुगलक  वंश समाप्त
(शासन काल-94वर्ष लगभग )

*👉सैय्यद  वंश*
1=1414 खिज्र खान
2=1421 मुइज़ुदिन मुबारक शाह दूसरा
3=1434 मुहमद शाह चौथा
4=1445 अल्लाउदीन आलम शाह
1451 सईद वंश समाप्त
(शासन काल-37वर्ष लगभग )

*👉लोदी वंश*
1=1451 बहलोल लोदी
2=1489 सिकंदर लोदी दूसरा
3=1517 इब्राहिम लोदी
1526 लोदी वंश समाप्त
(शासन काल-75 वर्ष लगभग )

*👉मुगल वंश*
1=1526 ज़ाहिरुदीन बाबर
2=1530 हुमायूं
1539 मुगल वंश मध्यांतर

*👉सूरी वंश*
1=1539 शेर शाह सूरी
2=1545 इस्लाम शाह सूरी
3=1552 महमूद  शाह सूरी
4=1553 इब्राहिम सूरी
5=1554 फिरहुज़् शाह सूरी
6=1554 मुबारक खान सूरी
7=1555 सिकंदर सूरी
सूरी वंश समाप्त,(शासन काल-16 वर्ष लगभग )

*मुगल वंश पुनःप्रारंभ*
1=1555 हुमायू दुबारा गाद्दी पर
2=1556 जलालुदीन अकबर
3=1605 जहांगीर सलीम
4=1628 शाहजहाँ
5=1659 औरंगज़ेब
6=1707 शाह आलम पहला
7=1712 जहादर शाह
8=1713 फारूखशियर
9=1719 रईफुदु राजत
10=1719 रईफुद दौला
11=1719 नेकुशीयार
12=1719 महमूद शाह
13=1748 अहमद शाह
14=1754 आलमगीर
15=1759 शाह आलम
16=1806 अकबर शाह
17=1837 बहादुर शाह जफर
1857 मुगल वंश समाप्त
(शासन काल-315 वर्ष लगभग )

*👉ब्रिटिश राज (वाइसरॉय)*
1=1858 लॉर्ड केनिंग
2=1862 लॉर्ड जेम्स ब्रूस एल्गिन
3=1864 लॉर्ड जहॉन लोरेन्श
4=1869 लॉर्ड रिचार्ड मेयो
5=1872 लॉर्ड नोर्थबुक
6=1876 लॉर्ड एडवर्ड लुटेनलॉर्ड
7=1880 लॉर्ड ज्योर्ज रिपन
8=1884 लॉर्ड डफरिन
9=1888 लॉर्ड हन्नी लैंसडोन
10=1894 लॉर्ड विक्टर ब्रूस एल्गिन
11=1899 लॉर्ड ज्योर्ज कर्झन
12=1905 लॉर्ड गिल्बर्ट मिन्टो
13=1910 लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंज
14=1916 लॉर्ड फ्रेडरिक सेल्मसफोर्ड
15=1921 लॉर्ड रुक्स आईजेक रिडींग
16=1926 लॉर्ड एडवर्ड इरविन
17=1931 लॉर्ड फ्रिमेन वेलिंग्दन
18=1936 लॉर्ड एलेक्जंद लिन्लिथगो
19=1943 लॉर्ड आर्किबाल्ड वेवेल
20=1947 लॉर्ड माउन्टबेटन

ब्रिटिस राज समाप्त शासन काल 90 वर्ष लगभग

*🇮🇳आजाद भारत,प्राइम मिनिस्टर🇮🇳*
1=1947 जवाहरलाल नेहरू
2=1964 गुलजारीलाल नंदा
3=1964 लालबहादुर शास्त्री
4=1966 गुलजारीलाल नंदा
5=1966 इन्दिरा गांधी
6=1977 मोरारजी देसाई
7=1979 चरणसिंह
8=1980 इन्दिरा गांधी
9=1984 राजीव गांधी
10=1989 विश्वनाथ प्रतापसिंह
11=1990 चंद्रशेखर
12=1991 पी.वी.नरसिंह राव
13=अटल बिहारी वाजपेयी
14=1996 ऐच.डी.देवगौड़ा
15=1997 आई.के.गुजराल
16=1998 अटल बिहारी वाजपेयी
17=2004 डॉ.मनमोहनसिंह
*18=2014 से  नरेन्द्र मोदी*

764 सालों  बाद मुस्लिमों तथा अंग्रेज़ों के ग़ुलामी से आज़ादी मिली है। ये हिन्दुओं का देश है। यहाँ बहुसंख्यक होते हुए भी हिन्दू अपने ही देश ग़ुलाम बन के रहे और आज लोग कह रहे है। हिन्दू साम्प्रदायिक हो गए ,,,,,,,,.....
 सदियों बाद नरेन्द्र मोदी तथा  योगी आदित्यनाथ  के रूप में हिन्दू की सरकार आयी है। सभी भारतियों को इन पर गर्व करना चाहिए।
🚩🚩 🚩🇮🇳🇮🇳🇮🇳

Sunday, January 13, 2019

What Is Heaven And Hell?

एक बुजुर्ग औरत मर गई, यमराज लेने आये।

औरत ने यमराज से पूछा, आप मुझे स्वर्ग ले जायेगें या नरक।

यमराज बोले दोनों में से कहीं नहीं।

तुमनें इस जन्म में बहुत ही अच्छे कर्म किये हैं, इसलिये मैं तुम्हें सिधे प्रभु के धाम ले जा रहा हूं।

बुजुर्ग औरत खुश हो गई, बोली धन्यवाद, पर मेरी आपसे एक विनती है।

मैनें यहां धरती पर सबसे बहुत स्वर्ग - नरक के बारे में सुना है मैं एक बार इन दोनों जगाहो को देखना चाहती हूं।

यमराज बोले तुम्हारे कर्म अच्छे हैं, इसलिये मैं तुम्हारी ये इच्छा पूरी करता हूं।

चलो हम स्वर्ग और नरक के रसते से होते हुए प्रभु के धाम चलेगें।

दोनों चल पडें, सबसे पहले नरक आया।

नरक में बुजुर्ग औरत ने जो़र जो़र से लोगो के रोने कि आवाज़ सुनी।

वहां नरक में सभी लोग दुबले पतले और बीमार दिखाई दे रहे थे।

औरत ने एक आदमी से पूछा यहां आप सब लोगों कि ऐसी हालत क्यों है।

आदमी बोला तो और कैसी हालत होगी, मरने के बाद जबसे यहां आये हैं, हमने एक दिन भी खाना नहीं खाया।

भूख से हमारी आतमायें तड़प रही हैं

बुजुर्ग औरत कि नज़र एक वीशाल पतिले पर पडी़, जो कि लोगों के कद से करीब 300 फूट ऊंचा होगा, उस पतिले के ऊपर एक वीशाल चम्मच लटका हुआ था।

उस पतिले में से बहुत ही शानदार खुशबु आ रही थी।

बुजुर्ग औरत ने उस आदमी से पूछा इस पतिले में कया है।

आदमी मायूस होकर बोला ये पतिला बहुत ही स्वादीशट खीर से हर समय भरा रहता है।

बुजुर्ग औरत ने हैरानी से पूछा, इसमें खीर है

तो आप लोग पेट भरके ये खीर खाते क्यों नहीं, भूख से क्यों तड़प रहें हैं।

आदमी रो रो कर बोलने लगा, कैसे खायें

ये पतिला 300 फीट ऊंचा है हममें से कोई भी उस पतिले तक नहीं पहुँच पाता।

बुजुर्ग औरत को उन पर तरस आ गया
सोचने लगी बेचारे, खीर का पतिला होते हुए भी भूख से बेहाल हैं।

शायद ईश्वर नें इन्हें ये ही दंड दिया होगा

यमराज बुजुर्ग औरत से बोले चलो हमें देर हो रही है।

दोनों चल पडे़, कुछ दूर चलने पर स्वरग आया।

वहां पर बुजुर्ग औरत को सबकी हंसने,खिलखिलाने कि आवाज़ सुनाई दी।

सब लोग बहुत खुश दिखाई दे रहे थे।
उनको खुश देखकर बुजुर्ग औरत भी बहुत खुश हो गई।

पर वहां स्वरग में भी बुजुर्ग औरत कि नज़र वैसे ही 300 फूट उचें पतिले पर पडी़ जैसा नरक में था, उसके ऊपर भी वैसा ही चम्मच लटका हुआ था।

बुजुर्ग औरत ने वहां लोगो से पूछा इस पतिले में कया है।

स्वर्ग के लोग बोले के इसमें बहुत टेस्टी खीर है।

बुजुर्ग औरत हैरान हो गई

उनसे बोली पर ये पतिला तो 300 फीट ऊंचा है

आप लोग तो इस तक पहुँच ही नहीं पाते होगें

उस हिसाब से तो आप लोगों को खाना मिलता ही नहीं होगा, आप लोग भूख से बेहाल होगें

पर मुझे तो आप सभी इतने खुश लग रहे हो, ऐसे कैसे

लोग बोले हम तो सभी लोग इस पतिले में से पेट भर के खीर खाते हैं

औरत बोली पर कैसे,पतिला तो बहुत ऊंचा है।

लोग बोले तो क्या हो गया पतिला ऊंचा है तो

यहां पर कितने सारे पेड़ हैं, ईश्वर ने ये पेड़ पौधे, नदी, झरने हम मनुष्यों के उपयोग के लिये तो बनाईं हैं

हमनें इन पेडो़ कि लकडी़ ली, उसको काटा, फिर लकड़ीयों के तुकडो़ को जोड़ के वीशाल सिढी़ का निर्माण किया

उस लकडी़ की सिढी़ के सहारे हम पतिले तक पहुंचते हैं

और सब मिलकर खीर का आंनद लेते हैं

बुजुर्ग औरत यमराज कि तरफ देखने लगी

यमराज मुसकाये बोले

*ईशवर ने स्वर्ग और नरक मनुष्यों के हाथों में ही सौंप रखा है,चाहें तो अपने लिये नरक बना लें, चाहे तो अपने लिये स्वरग, ईशवर ने सबको एक समान हालातो में डाला हैं*

*उसके लिए उसके सभी बच्चें एक समान हैं, वो किसी से भेदभाव नहीं करता*

*वहां नरक में भी पेेड़ पौधे सब थे, पर वो लोग खुद ही आलसी हैं, उन्हें खीर हाथ में चाहीये,वो कोई कर्म नहीं करना चाहते, कोई मेहनत नहीं करना चाहते, इसलिये भूख से बेहाल हैं*

*कयोकिं ये ही तो ईश्वर कि बनाई इस दुनिया का नियम है,जो कर्म करेगा, मेहनत करेगा, उसी को मीठा फल खाने को मिलेगा*

दोस्तों ये ही आज का सुविचार है, स्वरग और नरक आपके हाथ में है
मेहनत करें, अच्छे कर्म करें और अपने जीवन को स्वरग बनाऐं

14.01.2019

Some Health Tips.

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योग की कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए
1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
3. *हाई वी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।
6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं
7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी ।
8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।
10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।
11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी ।
12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
14.  *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।
16. *अस्थमा , मधुमेह , कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
18. *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
20. *RO* का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है ।
21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
23.  *भोजन* के लिए पूर्व दिशा , *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
24.  *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
26.  *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है ।
27.  *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।
29.  *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।
31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।
33.  *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
35.  *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।
36. *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
41.  *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,
43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।*
46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।
51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है
52.  *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
53.  *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
55.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
59. *अस्थमा में नारियल दें ।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
61.  *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
62.  *गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।*
63.  *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए
64.  *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*
65.  *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
66.  *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
68. *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।
69. *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है
71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें
72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।
73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
74. *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।*
75.  *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
76. *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए ।
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।
80.  *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।
81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।
82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।*
83. *जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।*
84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
86 .  *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग ।
87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए
88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।
89.  *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
90. *चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।*
91.  *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*
92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।
93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा
94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।
95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*।
98 . *तेज धूप* में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है
99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त , कफ* तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।
100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा। लार* है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके ।

_*जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के बाद साझा अवश्य करें।

*उबलतें दूध में जब डाली जाती हैं तुलसी की पतियाँ तो होता है चमत्कार - Tulsa with Milk*
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घरेलू नुस्खे बिना किसी साइड इफेक्ट के कई बीमारियों को दूर करते हैं। पीढि़यों से चले आ रहे ये नुस्खे हमेशा से फायदेमंद साबित हुए है और शायद आगे भी होते रहेंगे। ऐसे ही कुछ टिप्स तुलसी को लेकर भी है। तुलसी एक ऐसा हर्ब है जो कई समस्याओं को आसानी से दूर कर सकती है।

 सर्दी जुकाम हो या सिरदर्द तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से लाभ मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी को अगर दूध के साथ मिला लिया जाये तो ये कई बीमारियों के लिए रामबाण साबित होती है।

आज हम आपको बता रहे हैं कैसे तुलसी की तीन से चार पत्तियां उबलते हुए दूध में डालकर खाली पेट पीने से आप सेहतमंद रह सकते हैं।

*किडनी की पथरी में*
यदि किडनी में पथरी की समस्या हो गई हो और पहले दौर में आपको इसका पता चलता है तो तुलसी वाला दूध का सेवन सुबह खाली पेट करना शुरू कर दें। इस उपाय से कुछ ही दिनों में किडनी की पथरी गलकर निकल जाएगी। आपको इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।

*दिल की बीमारी में*
यदि घर में किसी को दिल से सबंधित कोई बीमारी है या हार्ट अटैक पड़ा हो तो आप तुलसी वाला दूध रोगी को सुबह के समय खाली पेट पिलाएं। इससे दिल से संबंधित कई रोग ठीक होते हैं।

*सांस की तकलीफ में*
सांस की सबसे खतरनाक समस्या है दमा। इस रोग में इंसान को सांस लेने में बड़ी परेशानी आती है। खासतौर पर तब जब मौसम में बदलाव आता है। इस
समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप दूध और तुलसी का सेवन करें। नियमित इस उपाय को करने से सांस से संबंधित अन्य रोग भी ठीक हो जाएगें।

*कैंसर की समस्या*
एंटीबायोटिक गुणों की वजह से तुलसी कैंसर से लड़ने में सक्षम होती है। दूध में भी कई तरह के गुण होते हैं जब दोनों आपस में मिलते हैं तो इसका प्रभाव बेहद प्रभावशाली और रोग नाशक हो जाता है। यदि आप नियमित तुलसी वाला दूध पीते हैं तो कैंसर जैसी बीमारी शरीर को छू भी नहीं सकती है।

*फ्लू*
वायरल फ्लू होने से शरीर कमजोर हो जाता है। यदि आप दूध में तुलसी मिलाकर सुबह खाली पेट इसका सेवन करते हो ता आपको फ्लू से जल्दी से आराम मिल जाएगा।

*टेंशन में*
अधिक काम करने से या ज्यादा जिम्मेदारियों से अक्सर हम लोग टेंशन में आ जाते हैं एैसे में हमारा नर्वस सिस्टम काम नहीं कर पाता है और हम सही गलत का नहीं सोचते हैं। यदि इस तरह की समस्या से आप परेशान हैं तो दूध व तुलसी वाला नुस्खा जरूर अपनाएं। आपको फर्क दिखने लगेगा।

*सिर का दर्द और माइग्रेन में*
सिर में दर्द होना आम बात है। लेकिन जब यह माइग्रेन का रूप ले लेती है तब सिर का दर्द भयंकर हो जाता है। ऐसे में सुबह के समय तुलसी के पत्तों को दूध में डालकर पीना चाहिए। यह माइग्रेन और सिर के सामान्य दर्द को भी ठीक कर देती है। अक्सर हमारे घर में बहुत सी प्राकृतिक औषधियां होती है जिनके बारे में पता रहने से हम मंहगी दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट से बच सकते हैं।
यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये की यह किसी के लिया रामबाण की तरह काम आएगा तो आप से 🙏निवेदन है कि इस 📨मैसेज को अपने *परिचित /मित्र/ या आपके व्हाट्स एप्प ग्रुप फ्रेंड्स* तक भेज दे ।

आपका यह कदम *स्वस्थ भारत के निर्माण* मैं योगदान के रूप में होगा

दुआ मैं बड़ी ताकत

*स्वस्थ रहो मस्त रहो व्यस्त रहो और सदा खुश रहो*

Sunday, January 6, 2019

Ideas For Good Health

Good articles to share:-

● To have Long Life, the 10 years from 70 to 79 years old are crucial!

Israeli scholars have found that
70-79 years old is a dangerous period. During this period, various organs decline rapidly. It is a frequent period of various geriatric diseases, and it is often prone to hyperlipemia, arteriosclerosis, hypertension, and diabetes.

After entering the age of 80, these diseases will decline, and the mental and physical health may return to the level of 60-69 years old.

Thus, the age of 70 to 79 years old is called the “dangerous age group”. As people grow older many people want to have a good healthy life. They realise that “Health is Wealth”.

The 10-year health care of 70 to 79 years old is crucial.

Here are some simple steps called
“Doing *ten ones * every day”

This will help you to navigate more smoothly through the "dangerous age group" stage of your life.


 1.    a pot of water

Water is "the best and cheapest health drink".
You must drink a glass of water during the following  three times/occasions each day:

First cup:
After getting out of bed, you can drink a glass of water on an empty stomach.

Because of our invisible sweating and urination. Even if we don't feel thirsty after getting up, the body liquids will still be thick due to lack of water. Therefore, after getting out of bed, you must slowly add water as soon as possible.

Second cup:
A glass of water after exercise

The right amount of exercise is one of the cornerstones of longevity. However, after exercise, special attention should be paid to replenishing water, it is recommended that the old people drink water.

Third cup:
a glass of water before going to bed can effectively reduce the blood viscosity and may even slow down the appearance of aging. Helps against Angina, myocardial infarction and other diseases.


2.   a bowl of porridge

If you feel sick, drink a bowl of porridge! Wang Shixiong, a famous medical scientist in the Qing Dynasty, called porridge "the first complement of the world" in his book.

China Daily Online published a 14-year study conducted by Harvard University on 100,000 people. It found that a bowl of about 28 grams of whole grain cereal porridge per day can reduce 5% mortality and 9%. and reduce the chance of getting cardiovascular disease.

Each volunteer was in good physical condition when he participated in the study in 1984, but in the 2010 feedback survey, more than 26,000 volunteers have passed away.

It was found that those volunteers who regularly eat whole grains such as porridge, brown rice, corn and buckwheat seem to have avoided all diseases, especially heart disease.

 3.   a cup of milk

Milk is known as "white blood" and is to the human body. Its nutritional value is well known with a lot of calcium, fat and protein

The recommended daily intake of milk and dairy products is 300 grams. For an ordinary 200 ml bottle of milk, it is enough to drink one or two 200 -ml - bottles or packets of milk a day.




4.   an apple

Modern research believes that apples have the effects of lowering cholesterol, losing weight, preventing cancer, preventing aging, enhancing memory, and making the skin smooth and soft.

The health benefits of different color apples are different:

Red apples have the effect of lowering blood lipids and softening blood vessels

Green apple has the effect of nourishing liver and detoxifying, and can fight depression, so it is more suitable for young people to eat.

Yellow apples have a good effect on protecting vision.

5.    an onion

The Onion has a very high nutritional value and has many functions, including helping to lower blood sugar, lowering cholesterol, preventing cancer, protecting cardiovascular and cerebrovascular diseases, and also anti- bacteria, preventing colds, and supplementing calcium and bones. Eat onions at least three or four times a week.



6.    Gentle walking

This has a magical anti-aging effect.  When adults walk (about 1 kilometre or less) regularly for more than 12 weeks, they will achieve the effect of correct posture and waist circumference, and the body becomes strong and not easily tired.

In addition, walking exercise is also beneficial to treat headache, back pain, shoulder pain, etc., and can promote sleep.

Experts believe that a 30-minute walk a day can get rid of the danger of “adult disease”. People who take 10,000 steps a day will have a lower chance of developing cardiovascular and cerebrovascular disease.

 7.   a hobby

Having a hobby, whether it is raising flowers, raising birds, collecting stamps, fishing, or painting, singing, playing chess, and traveling, can help the elderly to maintain extensive contact with society and nature. This broadens the horizons of interest of the elderly. They will love and cherish life.

8.   good mood

Old people should maintain good emotions as these are extremely important to their health. Common chronic diseases which affect the elderly are closely related to the negative emotions of the elderly:

Many patients with coronary heart disease have angina and myocardial infarction due to stimulation of adverse emotions, resulting in sudden death;

"Bad" temper leads to high blood pressure. In prolonged and severe cases, this can cause stroke, heart failure, sudden death, etc.;

Negative Emotions such as anger, anxiety, and grief can cause blood sugar levels to rise, causing metabolic disorders in the body.

This shows how important it is to have a good mood!

Physical aging is a natural phenomenon, and it is the most sensible choice to fully devote yourself to life and to live the best of the day!

If you feel that this article is useful, share it with more friends~......

Thursday, January 3, 2019

नाभि खिसकना / धरण जाना

नाभि खिसकना / धरण जाना – Nabhi , Dharan खिसकना _ Copied from Whatsapp messages received

नाभि खिसकना या धरण जाना आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचार पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नाभि को मानव शरीर का केंद्र माना जाता

है। नाभि स्थान से शरीर की बहत्तर हजार नाड़ियों जुड़ी होती है। यदि नाभि अपने स्थान से खिसक जाती है तो शरीर में कई प्रकार की समस्या

पैदा हो सकती है। ये समस्या किसी भी प्रकार दवा लेने से ठीक नहीं होती। इसका इलाज नाभि को पुनः अपने स्थान पर लाने से ही होता है।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसे नहीं माना जाता है। परंतु आज भी इस पद्धति से हजारों लोग ठीक होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
नाभि का अपने स्थान से खिसक जाने को नाभि हटना ( Nabhi Hatna)  , धरण जाना ( Dharan Jana ) , गोला खिसकना

( Gola khisakna ) पिचोटी खिसकना ( Pichoti Khisakna ) , नाभि पलटना ( Nabhi Palatna ) या नाभि चढ़ना

( Nabhi Chadhna ) आदि नामों से भी जाना जाता है।
नाभि खिसकने के कारण पेट दर्द , कब्ज , दस्त , अपच आदि होने लगते है। यदि नाभि का उपचार ना किया जाये तो शरीर में कई प्रकार की

अन्य परेशानियाँ पैदा हो सकती है। जैसे दाँत , बाल , आँखें प्रभावित हो सकते है , मानसिक समस्या पैदा हो सकती है। डिप्रेशन हो सकता है।

अतः नाभि का  पुनः अपने स्थान पर आना आवश्यक होता है।
नाभि खिसकने का कारण – Reason Of Dharan
Nabhi bar bar talne ka karan

यदि पेट की मांसपेशियां कमजोर होती है तो नाभि खिसकने की समस्या ज्यादा होती है । दैनिक जीवन के कार्य करते समय शरीर का संतुलन

सही नहीं रह पाने के कारण नाभि खिसक सकती है। इसके अलावा शरीर की मांस पेशियों पर एक तरफ अधिक भार पड़ने से भी धरण चली

जाती है , गोला सरक जाता है । पेट पर बाहरी या अंदरूनी दबाव नाभि टलने का कारण हो सकता है। सामान्य कारण इस प्रकार है :-



असावधानी से दाएं या बाएं झुकना।


संतुलित हुए बिना अचानक एक हाथ से वजन उठाना।


चलते हुए अचानक ऊंची नीची जगह पर पैर पड़ना।


खेलते समय गलत तरीके से उछलना।


तेजी से सीढ़ी चढ़ना या उतरना।


ऊंचाई से छलांग लगाना।


पेट में अधिक गैस बनना।


पेट में किसी प्रकार की चोट लगना।


स्कूटर या मोटर साइकिल चलाते समय झटका लगना।
गर्भावस्था में पेट पर आतंरिक दबाव ।
तनाव।
बचपन से किसी कारण से नाभि खिसकी हुई हो।
नाभि खिसकने की जाँच – Dharan Kaise Jane
Nabhi Talna kese jane

नाभि टलने या खिसकने का पता लगाने के बहुत आसान तरीके होते है। इनको जानकर आप भी नाभि खिसकने या धरण जाने का पता कर

सकते है। थोड़े से अनुभव के बाद तुरंत पता  चल जाता है। अधिकतर पुरुष की नाभि बायीं तरफ तथा स्त्रियों की नाभि दायीं तरफ खिसकती

है।
नाभी के खिसकने का पता करने की विधि इस प्रकार है :-
( 1 )

सीधे खड़े हो जाएँ। दोनों पैर पास में सीधे रखें। अपने दोनों हाथ सीधे करें। हथेलियां खुली रखकर इस तरह समानांतर रखें की दोनों छोटी

अंगुलीयां  (Little Finger ) पास में रहें। हथेली की रेखा मिलाते हुए छोटी अंगुली  (Little Finger )  की लंबाई चेक करें। यदि छोटी

अंगुलियां की लंबाई में फर्क नजर आता है यानि कनिष्ठा अंगुलियां छोटी बड़ी नजर आती है तो नाभि खिसकी हुई है।
( 2 )

पुरुष की नाभि चेक करने के लिए एक धागे से उसकी नाभि और एक छाती के केन्द्रक के बीच की दूरी नापें। अब नाभि से दूसरी छाती के

केन्द्रक की दूरी नापें। यदि नाप अलग अलग आती है तो नाभि खिसकी हुई है।
( 3 )

सुबह खाली पेट चटाई पर पीठ के बल लेट जाएँ। हाथ और पैर सीधे रखें। हथेलियाँ जमीन की तरफ रखें। अब अंगूठे से नाभि पर हल्का दबाव

डालकर स्पंदन चेक करें। यदि स्पंदन नाभि पर महसूस होता है तो नाभि सही है।  यदि स्पंदन नाभि के स्थान पर ना होकर नाभि से  ऊपर ,

नीचे , दाएं या बाएं महसूस होता है तो नाभि अपने स्थान से खिसकी हुई है। जिस प्रकार कलाई पर अंगूठे के नीचे नाड़ी देखने पर स्पंदन

महसूस होता है। इसी प्रकार का स्पंदन नाभि पर महसूस होता है।
( 4 )

सीधे पीठ के बल लेट जाएँ। दोनों पैर पास में लाएं यदि पैर के अंगूठे ऊपर नीचे दिखाई दें तो नाभि अपने स्थान से हटी हुई है।
नाभि खिसकने से नुकसान – Dharan Jane Ke Nuksan
Nabhi Talne Ke Nuksan

यदि नाभि नीचे की ओर खिसक गई है तो दस्त , अतिसार , पेचिश आदि की समस्या हो जाती है।


नाभि के ऊपर की तरफ खिसकने पर कब्ज रहने लगती है। गैस अधिक बनती है। इसके कारण लंबी अवधि में फेफड़ों की समस्या , अस्थमा , डायबिटीज आदि बीमारियां हो सकती है।


बाईं और खिसकने पर सर्दी , जुकाम , खाँसी , कफ आदि की समस्या बार बार हो सकती है।


दायीं तरफ खिसकने पर लीवर पर असर पड़ सकता है। एसिडिटी हो सकती है , अपच या अफारा हो सकते है।


यदि नाभि अधिक गहराई में महसूस हो तो व्यक्ति कितना भी खाये शरीर कृशकाय ही बना रहता है।
नाभि को ठीक करने के उपाय – Dharan Theek Kaise Kare_
Nabhi Vapas Kese Laye
नाभि खिसके या गोला सरके हुए अधिक समय नहीं हुआ हो तो नीचे दिए गए तरीके अपनाने से जल्द वापस अपनी जगह आ जाती है। यदि

समय अधिक हो गया हो तो थोड़ा अधिक प्रयास करना पड़ता है। यदि नीचे दिए गए तरीको से लाभ ना हो तो किसी अनुभवी से नाभि सही

करवानी चाहिए। कुछ लोग खुद का पेट तेल लगा कर मसल कर नाभि सही करने का प्रयास करते है ,जो उचित तरीका नहीं है। पेट को

मसलना नहीं चाहिए।

यहाँ जो नाभि ठीक करने के तरीके ( Dharan  theek karne ke tareeke ) दिए गए है उनमे से अपनी शारीरिक अवस्था के अनुसार
नाभि को वापस अपनी जगह ला सकते है। 

(1 )

जिस हाथ की छोटी अंगुली की लंबाई कम हो उस हाथ सीधा करें। हथेली ऊपर की तरफ हो।  अब इस हाथ को दुसरे हाथ से कोहनी के जोड़

के पास से पकड़ें। अब पहले वाले हाथ की मुट्ठी कस कर बंद करें। इस मुट्ठी से झटके से अपने इसी तरफ वाले कंधे पर मारने की कोशिश

करें। कोहनी थोड़ी ऊंची रखें।  ऐसा दस बार करें।



अब अंगुलियों की लंबाई फिर से चेक करें। लंबाई का फर्क मिट गया होगा। यानि नाभि अपने स्थान पर आ गई है। यही ऐसा नहीं हुआ तो एक

बार फिर से यही क्रिया दोहराएं।

( 2 )

सुबह खाली पेट सीधे पीठ के बल चटाई या योगा मेट पर लेट जाएँ। दोनों पैर पास में हो और सीधे हो। हाथ सीधे हो और कलाई जमीन की

तरफ हो। अब धीरे धीरे दोनों पैर एक साथ ऊपर उठायें। इन्हें लगभग 45 ° तक ऊँचे करें। फिर धीरे धीरे नीचे ले आएं। इस तरह तीन बार

करें। नाभि सही स्थान पर आ जाएगी। यह उत्तानपादासन कहलाता है।

( 3 )

सुबह खाली पेट योगा मेट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएँ। अब एक पैर को मोड़ें और दोनों हाथों से पैर को पकड़ लें। दूसरा पैर सीधा ही रखें।

जिस प्रकार शिशु अपने पैर को पकड़ कर पैर का अंगूठा मुँह में डाल लेते है उसी प्रकार आप पैर को पकड़ कर अंगूठे को धीरे धीरे अपनी

नाक की तरफ बढ़ाते हुए नाक से अड़ाने की कोशिश करें। सर को थोड़ा ऊपर उठा लें। अब धीरे धीरे पैर सीधा कर लें।यह एक योगासन है

जिसे पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कहते है

इसी प्रकार दुसरे पैर से यही क्रिया करें। इस प्रकार दोनों पैरों से तीन तीन बार करें। फिर एक बार दोनों पैर एक साथ मोड़ कर यह क्रिया करें।

नाभि अपनी सही जगह आ जाएगी।

यदि आपकी मांस पेशियाँ कमजोर है तो बार बार नाभि खिसक सकती है , गोला खिसक सकता है । अतः थोड़ा व्यायाम आदि करके उन्हें मजबूत करे।
 पैर के अंगूठे में काला धागा बांधने से नाभि बार बार नहीं खिसकती है


Friday, December 28, 2018

शीत ऋतू में पाँच श्रेष्ठ "एंटी-एजिंग" उपाय

शीत ऋतू में पाँच श्रेष्ठ "एंटी-एजिंग" उपाय●●●●


हेमंत-शिशिर ऋतू में वायु का प्रकोप होने से शरीर में रुक्षता(रूखापन) बढ़ती चली जाती है। यही रुक्षता शरीर को आयु से पहले बूढ़ा बना सकती है। इसी रुक्षता से शरीर में झुर्रियां पड़ती हैं,त्वचा ढीली हो जाती है,बेजान लगने लगती है,शरीर के समस्त जोड़ो(जॉइंट्स) में प्रवेश कर दर्द पैदा कर देती है-घुटने का दर्द,कमर दर्द,सरविकल,साइटिका समस्त दर्दों को बढ़ा कर जीवन की दुश्वारियां बढ़ा देती है। यही रुक्षता आंतो में पहुंचकर मल को रुक्ष बनाकर कब्ज पैदा कर देती है जिससे आगे चलकर बवासीर,भगंदर ,कैंसर जैसे गंभीर जानलेवा रोग पैदा हो जाते हैं।

इसलिए आयुर्वेद अनुसार शीत ऋतू में वायु के बढे प्रकोप को कम करना ही "एंटी-एजिंग" है, और ये बेहद सरल है।

पांच श्रेष्ठ एंटी-एजिंग समाधान आयुर्वेद अनुसार

1. शुद्ध गौ-घृत खाना- देवताओं को भी दुर्लभ,सिर्फ भारत में बनने वाला(दुनिया के किसी विकसित देश में नहीं बनता) गौ-घृत अपनी विशिष्ट स्निग्धता(चिकनाई) के कारण रूखी वायु के प्रकोप को शांत करने का सर्वश्रेष्ठ समाधान है।पृथ्वीलोक में बेस्ट एंटी एजिंग प्रॉपर्टीज,जो हमें डॉक्टर्स,फार्मा कंपनी माफिया,अमरीका से आयी मान्यताओं ने खाने से मना कर दिया है।
पारंपरिक विधि से बना शुद्ध गौ-घृत खाइये बढ़ती उम्र पर रोक लगाइये।

2. अभ्यंग: प्रतिदिन शुद्ध तिल तेलं से संपूर्ण शरीर का अभ्यंग(मालिश) कीजिये। त्वचा के माध्यम से तिल तेलं शरीर में प्रवेश कर वायु की रुक्षता को समाप्त करता है।
ग्लिसरीन,वेसेलिन छोड़िये तिल तेलं की मालिश कीजिये।

3. आंवला खाइये: तीनो दोषों को एकसाथ संतुलित करने वाला आंवला खाइये। कच्चा खाइये,चटनी बनाकर खाइये, या च्यवनप्राश में खाइये।सप्त धातुओं को पोषित करने वाला आंवला शीट ऋतू का बेस्ट फल है।
सावधान: सोडियम बेंज़ोट डला आंवला जूस किसी भी कंपनी का गलती से भी ना पियें।

4. नाक-नाभि में घी और कान में तेलं डालने से वायु का प्रकोप कम होता है और ये बढ़ती आयु के प्रकोप जैसे ऊँचा सुनना,स्मरण शक्ति कमजोर होना,बाल झड़ना,होठ फटना जैसी समस्याओं पर रोक लगाकर आयु को स्थिर करता है।

5. एकदम ताज़ा- रसीला- स्निग्ध भोजन करना, - बासी,फ्रिज का रखा,बाजारू पदार्थ वायु से भरे होते हैं और शरीर में वायु को बढाकर आयु से पहले शरीर को बूढ़ा बना देते हैं।

आयुर्वेद सम्मत एंटी-एजिंग, संपूर्ण शारीर के लिए स्थायी,परिणाम देने वाले ,सरल समाधान अपनाइए विदेशी कंपनियों के दुष्चक्र से बाहर आइये।

आपके स्वास्थ्य का शुभ-चिंतक
गव्यसिद्ध विशाल


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निमोनिया के उपाए

निमोनिया एक ऐसी बीमारी है जो छोटे बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है। सर्दी ठंड व बारिश के दिनों में इस बीमारी का खतरा और भी बढ़ जाता है। निमोनिया होने पर पहले हल्का सर्दी-जुकाम होता है फिर यह धीरे-धीरे बढ़कर निमोनिया में बदल जाता है। इससे बच्चों की छाती में कफ जम जाता है जिससे उन्हें सांस लेने में भी मुश्किल होती है। ऐसे में कुछ घरेलू नुस्खे अपनाकर निमोनिया से राहत पाई जा सकती है क्योंकि बच्चे दवाई खाने से मना करते हैं जिससे यह नुस्खे उन्हें फायदा दिलाएंगे।

निमोनिया के लक्षण
तेज सांस लेना
कफ और खांसी
होंठों और नाखुन का रंग पीला पड़ना
उल्टी आना
सीने और पेट में दर्द

निमोनिया के घरेलू उपाय

1. हल्दी
हल्दी में मौजूद एंटीबायोटिक गुण शरीर को कई बीमारियों से दूर रखते हैं। निमोनिया होने पर थोड़ी-सी हल्दी को गुनगुने पानी में मिलाएं और इसे छाती पर लगाने से राहत मिलती है।

2. लहसुन का पेस्ट
इसके लिए लहसुन की कुछ कलियों को मसलकर उसका पेस्ट बना लें और रात को सोने से पहले बच्चे की छाती पर लगा दें जिससे शरीर को गर्माहट मिलेगी और कफ बाहर निकलेगा।

3. लौंग
एक गिलास पानी में 5-6 लौंग, काली मिर्च और 1 ग्राम सोडा डालकर उबाल लें। अब इस मिश्रण को दिन में 1-2 बार लेने से फायदा होता है।

4. ब्लैक टी और मेथी
इसके लिए 2 चम्मच मेथी पाउडर में 1 कप ब्लैक टी मिलाएं और उबाल कर काढ़ा बना लें। इसे दिन में 1 बार पीने से बहुत जल्दी निमोनिया से राहत मिलती है।

5. तुलसी
तुलसी की कुछ पत्तियों को पीस कर उसका रस निकाल लें और इसमें थोड़ी-सी काली मिर्च मिलाकर दिन में 2 बार पीएं।

6. पुदीना और शहद
पुदीने की पत्तियों का रस निकाल कर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर लेने से भी निमोनिया से राहत मिलती है।

7.लाल मिर्च
लाल मिर्च में उच्‍च मात्रा में कैप्‍स‍ासिन होता है जो श्‍वसन मार्ग से बलगम को हटाने में मदद करता है। लाल मिर्च बीटा-कोरटेन का भी अच्‍छा स्रोत होती है, जो कफ की झिल्‍ली को सुरक्षित रखता है।
करीब 250 मिली पानी में थोड़ी सी लाल मिर्च और थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर दिन में कुछ बार इसका सेवन करें।
आप गाजर के जूस में भी लाल मिर्च डालकर पी सकते हैं। ये दोनों ही तत्‍व निमोनिया के इलाज के लिए मददगार होते हैं।

8.मेथी के बीज
मेथी के बीज म्‍यूको‍लिटिक गुण होते हैं, जो छाती में जमने वाली बलगम को पतला करने में मदद करते हैं। इसलिए मेथी का सेवन करने से बंद छाती खुल जाती है। मेथी के सेवन से पसीना आता है, जिससे बुखार कम होता है और शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं।
दो कप पानी में एक चम्‍मच मेथी के दाने डालकर उनकी चाय बना लें। इस चाय को छानकर दिन में चार बार पियें। स्‍वाद में इजाफा करने के लिए इसमें नींबू का रस मिलाया जा सकता है। जैसे जैसे आपको अपनी सेहत में सुधार दिखने लगे आप इसकी मात्रा कम कर सकते हैं।
एक कप पानी में मेथी के दाने, एक चम्‍मच अदरक का पेस्‍ट, एक लहसुन की कली पिसी हुई, और थोड़ी सी काली मिर्च डालकर पांच मिनट तक उबालें। इसे छान लें और फिर इसमें आधा चम्‍मच नींबू का रस डाल दें। आप चाहें तो इसमें शहद भी मिला सकते हैं। दिन में तीन चार बार इसका सेवन कीजिये। आराम होगा

9.तिल के बीज
तिल कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। एक कप पानी में एक चम्‍मच तिल को उबालें, अब इसमें एक चम्‍मच अलसी के बीज डाल दें और पानी को यूं ही उबलने दें। फिर इसे छानकर एक चम्‍मच शहर और थोड़ा सा नमक मिला लें। इस मिश्रण का रोजाना सेवन करें।

10.तुलसी और काली मिर्च
ये दोनों ही तत्‍व हमारे फेफड़ों के लिए फायदेमंद होते हैं। और ये कुदरती रूप से निमोनिया को दूर करने में मददगार है।
तुलसी के पत्‍तों का रस लेकर उसमें ताजी पिसी काली मिर्च मिलाइये और हर छह घंटे बाद इसका सेवन कीजिये।
इसके साथ ही खांसी की कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें। खांसी कई मायनों में आपके लिए फायदेमेंद हो सकती है क्‍योंकि यह शरीर से कफ को बाहर निकालती है

Thursday, December 27, 2018

गहरी नींद के लिए पर्याप्त व्यायाम

*गहरी नींद के लिए पर्याप्त व्यायाम आवश्यक*

बहुत से लोग यह शिकायत करते पाये जाते हैं कि उनको रात में नींद नहीं आती और यदि आती भी है तो गहरी नींद नहीं आती, जिसके कारण उनके तन-मन को पूरा विश्राम नहीं मिलता और दिनभर वे थके-थके से रहते हैं।

इसका कारण यह है कि उनके शरीर को पर्याप्त थकान नहीं होती। गहरी नींद के लिए यह आवश्यक है कि यदि उनका कार्य शारीरिक परिश्रम का नहीं है तो वे व्यायाम करके शरीर को इतना अवश्य थका लें कि बिस्तर पर पड़ते ही उनको गहरी नींद आ जाये।

यदि किसी कारणवश आपको ऐसा लगता है कि किसी दिन बिस्तर पर जाते समय आपका शरीर विश्राम के लिए तत्पर नहीं है तो बिस्तर पर ही आप कुछ व्यायामों को करके गहरी नींद लाना सुनिश्चित कर सकते हैं। ये व्यायाम हैं- क्वीन, किंग, मत्स्य व्यायाम, और ब्रह्मचर्यासन।

यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि शयन करने जाने से दो-तीन घंटे पूर्व आपने सायंकालीन भोजन कर लिया हो और वह अधिकांशत: पच गया हो। यहाँ ये व्यायाम करने की विधि संक्षेप में बतायी जा रही है और वीडियो/चित्र भी दिये जा रहे हैं। ये व्यायाम इसी क्रम में करने चाहिए।

*क्वीन एक्सरसाइज़*

चित लेट जाइये। हाथों को कंधों की सीध में दोनों ओर फैला लीजिए। पैरों को सिकोड़कर घुटने ऊपर उठाकर मिला लीजिए। पैर जाँघ से सटे रहेंगे। अब दोनों घुटनों को एक साथ बायीं ओर ले जाकर जमीन पर रखिए और सिर को दायीं ओर घुमाकर ठोड़ी को कंधे से लगाइए। कुछ सेकण्ड इस स्थिति में रुककर घुटनों को घुमाते हुए दायीं ओर जमीन से लगाइए और सिर को घुमाते हुए ठोड़ी को बायें कंधे से लगाइए। इसतरह बारी-बारी से दोनों तरफ 10-10 बार कीजिए। यह मर्कटासन की प्रथम स्थिति है।

*किंग एक्सरसाइज*

चित लेट जाइये। हाथों को कंधों की सीध में दोनों ओर फैला लीजिए। पैरों को सिकोड़कर घुटने ऊपर उठा लीजिए और पैरों में एक-डेढ़ फीट का अन्तर दीजिए। अब दोनों पैरों को एक साथ बायीं ओर ले जाकर जमीन से लगाइए और सिर को दायीं ओर घुमाकर ठोड़ी को कंधे से लगाइए। इस स्थिति में दायें पैर का घुटना बायें पैर की एड़ी को छूते रहना चाहिए। कुछ सेकण्ड इस स्थिति में रुककर घुटनों को उठाकर घुमाते हुए दायीं ओर जमीन से लगाइए और सिर को घुमाते हुए ठोड़ी को बायें कंधे से लगाइए। इस स्थिति में बायें पैर का घुटना दायें पैर की एड़ी को छूते रहना चाहिए। इस प्रकार बारी-बारी से दोनों तरफ 10-10 बार कीजिए। यह मर्कटासन की द्वितीय स्थिति है।

*मत्स्य व्यायाम*

चित लेट जाइए। हाथ बग़ल में रहें। अब पैरों की एड़ियों के बिस्तर पर सरकाते हुए पूरा ऊपर उठाइए। इसके साथ ही हाथों को कोहनी से मोड़ते हुए ऊपर उठाइए और उँगलियों को कंधे से छुआइए। इसके बाद तुरंत ही पैरों और हाथों को नीचे लाते हुए पूर्व स्थिति में ले आइए। इस तरह लगातार कई बार करना है।

*ब्रह्मचर्यासन*

वज्रासन में बैठते हुए पैरों के पंजों को भीतर के बजाय बाहर की ओर मोड़कर बैठिए। चूतड़ ज़मीन पर टिके रहेंगे। इस स्थिति में एक-दो मिनट रहना पर्याप्त है।

सोने से तत्काल पहले इन व्यायामों को बिस्तर पर ही कर लेने से बहुत गहरी नींद आती है तथा अन्य कई लाभ होते हैं।

— *विजय कुमार सिंघल*
पौष कृ ५, सं २०७५ वि (२७ दिसम्बर २०१८)


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*पछतावा*

आस्ट्रेलिया की ब्रोनी वेयर कई वर्षों तक कोई meaningful काम तलाशती रहीं, लेकिन कोई शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव न होने के कारण बात नहीं बनी।
फिर उन्होंने एक हॉस्पिटल की Palliative Care Unit में काम करना शुरू किया। यह वो Unit होती है जिसमें Terminally ill या last stage वाले मरीजों को admit किया जाता है। यहाँ मृत्यु से जूझ रहे लाईलाज बीमारियों व असहनीय दर्द से पीड़ित मरीजों के मेडिकल डोज़ को धीरे-धीरे कम किया जाता है और काऊँसिलिंग के माध्यम से उनकी spiritual and faith healing की जाती है ताकि वे एक शांतिपूर्ण मृत्यु की ओर उन्मुख हो सकें।
ब्रोनी वेयर ने ब्रिटेन और मिडिल ईस्ट में कई वर्षों तक मरीजों की counselling करते हुए पाया कि मरते हुए लोगों को कोई न कोई पछतावा ज़रूर था।
कई सालों तक सैकड़ों मरीजों की काउंसलिंग करने के बाद ब्रोनी वेयर  ने मरते हुए मरीजों के सबसे बड़े 'पछतावे' या 'regret' में एक कॉमन पैटर्न पाया।
जैसा कि हम सब इस universal truth से वाकिफ़ हैं कि मरता हुआ व्यक्ति हमेशा सच बोलता है, उसकी कही एक-एक बात epiphany अर्थात 'ईश्वर की वाणी' जैसी होती है। मरते हुए मरीजों के इपिफ़नीज़ को  ब्रोनी वेयर ने 2009 में एक ब्लॉग के रूप में रिकॉर्ड किया। बाद में उन्होनें अपने निष्कर्षों को एक किताब “THE TOP FIVE REGRETS of the DYING" के रूम में publish किया। छपते ही यह विश्व की Best Selling Book साबित हुई और अब तक  लगभग 29 भाषाओं में छप चुकी है। पूरी दुनिया में इसे 10 लाख से भी ज़्यादा लोगों ने पढ़ा और प्रेरित हुए।

ब्रोनी द्वारा listed 'पाँच सबसे बड़े पछतावे' संक्षिप्त में ये हैं:

1) "काश मैं दूसरों के अनुसार न जीकर अपने अनुसार ज़िंदगी जीने की हिम्मत जुटा पाता!"

यह सबसे ज़्यादा कॉमन रिग्रेट था, इसमें यह भी शामिल था कि जब तक हम यह महसूस कर पाते हैं कि अच्छा स्वास्थ्य ही आज़ादी से जीने की राह देता है तब तक यह हाथ से निकल चुका होता है।

2) "काश मैंने इतनी कड़ी मेहनत न की होती"

ब्रोनी ने बताया कि उन्होंने जितने भी पुरुष मरीजों का उपचार किया लगभग सभी को यह पछतावा था कि उन्होंने अपने रिश्तों को समय न दे पाने की ग़लती मानी।
ज़्यादातर मरीजों को पछतावा था कि उन्होंने अपना अधिकतर जीवन अपने कार्य स्थल पर खर्च कर दिया!
उनमें से हर एक ने कहा कि वे थोड़ी कम कड़ी मेहनत करके अपने और अपनों के लिए समय निकाल सकते थे।

3) "काश मैं अपनी फ़ीलिंग्स का इज़हार करने की हिम्मत जुटा पाता"

ब्रोनी वेयर ने पाया कि बहुत सारे लोगों ने अपनी भावनाओं का केवल इसलिए गला घोंट दिया ताकि शाँति बनी रहे, परिणाम स्वरूप उनको औसत दर्ज़े का जीवन जीना पड़ा और वे जीवन में अपनी वास्तविक योग्यता के अनुसार जगह नहीं पा सके! इस बात की कड़वाहट और असंतोष के कारण उनको कई बीमारियाँ हो गयीं !

4) "काश मैं अपनों अपने दोस्तों के सम्पर्क में रहा होता"

ब्रोनी ने देखा कि अक्सर लोगों को मृत्यु के नज़दीक पहुँचने तक अपनों के प्यार और पुराने दोस्ती के पूरे फायदों का वास्तविक एहसास ही नहीं हुआ था !
अधिकतर तो अपनी ज़िन्दगी में इतने उलझ गये थे कि उनकी कई वर्ष पुरानी 'गोल्डन फ़्रेंडशिप' उनके हाथ से निकल गयी थी। उन्हें अपनी 'दोस्ती' को अपेक्षित समय और ज़ोर न देने का गहरा अफ़सोस था । हर कोई मरते वक्त अपने नज़दीकियों और दोस्तों को याद कर रहा था !

5) "काश मैं अपनी इच्छानुसार स्वयं को खुश रख पाता!!!"

आम आश्चर्य की यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात सामने आयी कि कई लोगों को जीवन के अन्त तक यह पता ही नहीं लगता है कि 'ख़ुशी' भी एक choice है!

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि-
'ख़ुशी वर्तमान पल में है'...
'Happiness Is Now'...

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*जीवन का एक लक्ष्य बनाइए*

अगर किसी व्यक्ति से यह पूछा जाये कि आप क्यों जीवित हैं, तो वह व्यक्ति हमसे अवश्य नाराज होगा और सम्भव है कि कुछ उल्टा-सीधा भी कह डाले। लेकिन यह सवाल पूरी तरह उचित है। अधिकांश व्यक्ति नहीं जानते कि वे क्यों जी रहे हैं। वे बस यही सोचते है कि उन्होंने मनुष्य के रूप में जन्म लिया है इसलिए जीवन के दिन काट रहे हैं।

लेकिन इस प्रकार लक्ष्यविहीन जीवन जीना मनुष्य के लिए उचित नहीं। आहार, निद्रा, भय, मैथुन ये सब तो पशु-पक्षियों में भी होता है। मनुष्य का जीवन इन सबसे ऊपर होना चाहिए, क्योंकि मनुष्य को ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति कहा गया है।

इसलिए सार्थक जीवन जीने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने जीवन का एक उद्देश्य निश्चित करें और यथासम्भव उस लक्ष्य की प्राप्ति का उद्योग करते रहें। ऐसा लक्ष्य कोई बहुत बडा या लम्बा चौड़ा हो यह भी कोई आवश्यक नहीं है। अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार हमें अपना लक्ष्य निश्चित करना चाहिए, चाहे वह छोटा-सा ही हो।

बहुत से लोग धन-सम्पत्ति कमाने या परिवार बढाने को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लेते हैं। यह उन लोगों से तो अच्छा है जिनका कोई लक्ष्य नहीं है, लेकिन यह समाज के लिए बहुत उपयोगी नहीं होता। ऐसे लोग अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति को खोकर केवल इसी निरर्थक लक्ष्य की पूर्ति में लगे रहते हैं।

अत: हमारे जीवन का लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि वह हमारे लिए तो आनन्ददायक हो ही, समाज के लिए भी उपयोगी हो। समाज के किसी वर्ग की सेवा करना ऐसा सार्थक लक्ष्य कहा जा सकता है। अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार हमें समाज का वह वर्ग चुन लेना चाहिए जिसकी हम नि:स्वार्थ सेवा करके अपना जीवन सफल कर सकते हैं।

लक्ष्यविहीन जीवन नीरस होता है। नीरसता से अन्त में ऊब पैदा होती है और मानसिक तनाव, अवसाद आदि व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं, जिनकी परिणिति कई बार आत्महत्या जैसी घटनाओं में होती देखी जाती है। इसलिए हमें नीरसता से बचना चाहिए।

जीवन को नीरस होने से बचाने का एक सरल उपाय यह हो सकता है कि हम सप्ताह में कम से कम एक दिन अपने घर से बाहर निकलकर समाज में जायें। यदि कहीं बाहर जाने की सुविधा और समय न हो तो अपने घर से कुछ ही किलोमीटर दूर अपने शहर के ही किसी बडे पार्क या पिकनिक स्पॉट या मन्दिर आदि में जाकर कुछ घंटे गुज़ारें और वहाँ प्रकृति का आनन्द लें।

जो शारीरिक रूप से सक्षम हैं वे अस्पताल, अनाथाश्रम, वृद्धाश्रम, विद्यालय, मन्दिर, गुरुद्वारा, मलिन बस्ती आदि में सप्ताह में एक-दो बार जाकर कुछ न कुछ सार्थक कार्य कर सकते हैं जिससे उनकी आत्मा को असीम शांति का अनुभव होगा और जीवन सार्थक बनेगा।

— *विजय कुमार सिंघल*
पौष कृ २, सं २०७५ वि (२४ दिसम्बर २०१८)

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